हमराही

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Saturday, February 9, 2013

''कुछ मीठा हो जाए.............''





'कुछ मीठा हो जाए' का मन अगर कर आया है
क्यों? चाकलेट चाकलेट चारों ओर ही छाया है
गर्लफ्रेंड को देने को बेटा चाकलेट लाया है 
यह तो पूछो उसकी माँ ने नीवाला खाया है

माना यह इज़हारे प्यार है उससे तुम्हारा
पूछ लो अगर माँ को तो क्या बिगड़े तुम्हारा
ना चाहे कुछ तुमसे कभी, देगी केवल दुआएँ
बेटा ना कभी तुझे छुएँ जमाने की गर्म हवाएँ

करो एक वादा आज किसी ग़रीब का चूल्हा जलाओगे
खाना किसी भूखे को ,अपनी कमाई से खिलाओगे 
देगा जो आशीर्वाद तुम्हे वो जाएगा ना कभी खाली
एक दिन के लिए बन जाओ उसकी बगिया के माली