हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

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Friday, April 24, 2015

क्षणिकाएँ

जिंदगी के थपेड़ों ने
जब भी थका दिया मुझे
आ बैठी मैं
यादों के बरगद की छाँव में
सहलाया मुझे यादों ने
दे गईं
मन को असीम सुकून
आँखों से बहती पीर
..................
गिरगिट की तरह बदलती
मानवी संवेदनायें
कर जाती
मन को घायल
सुकून मिलता केवल
तेरी यादों की मरहम से
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Friday, April 17, 2015

फिसल रही है जिंदगी

बढ़ रही हैं इच्छाएं 
अमर बेल की मानिंद 
पिघल रही हूँ मैं 
ग्लेशियर की मानिंद 
फिसल रही है जिंदगी 
रेत की मानिंद 
..............................

Saturday, February 28, 2015

किताबे जिंदगी खोलूँ पलों में मुस्कराना तुम [गजल]

किताबे जिंदगी खोलूँ पलों में मुस्कराना तुम 
वो सूखे पुष्प सा बनकर सदा यादों में आना तुम |

तमस को जिंदगी से दूर कर के रोशनी बनना
सुबह की ओस बनकर अब सदा ही खिलखिलाना तुम |


जो जीना देर से सीखे, वो जीवन राग क्या जाने 
सभी लम्हे समेटे जिंदगी का राग गाना तुम |

कभी जो जीतना हो जीतना खुद को ही तुम लेकिन 
वफा के वास्ते फिर जीत सरिता हार जाना तुम |

*****