हमराही

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Saturday, August 17, 2013

धरती अपनी बचाओ [रोला छंद]

चित्र से काव्य तक छंदोत्सव 

चलो उठो मनुज अब ,निद्रा अभी तुम त्यागो 
जाग जाएंगे सब ,स्वयं तो पहले जागो 

नदिया पेड़ पहाड़ ,करें ना तेरी मेरी 
रखो इसे संभाल , सब हैं धरोहर तेरी 

लगे तुम्हें क्यों डर , देख जो बदरा जागे
स्वयं बुलाया प्रलय , स्वयं ही इससे भागे 

शोर मचा चहुँ ओर , तुम भी हाथ बंटाओ 
बढ़ी ग्लोब वार्मिंग , धरती अपनी बचाओ 

नन्हे नन्हे हाथ , धरा को जब थामेंगे   
माँ का आंचल थाम , स्नेह से सब मांगेंगे 

धरा है माँ समान, करना ना वैर इससे 
हुई अगर यह रुष्ट ,खैर मांगोगे किससे 
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