हमराही

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Sunday, March 12, 2017

चुनावी होली दोहे


सरिता मेरा नाम है ,बढ़ती हूँ निष्काम।
मोदी की जय बोल दो , बोलो जय श्री राम।।
जो गी रा सा रा रा

लाया है होली मिलन, खुशियाँ आज विशेष
अभिनन्दन है भाजपा, शुभकामना अशेष।।
जो गी रा सा रा रा

ख़ुशी हुई है दोगुनी, होली के दिन ख़ास।
अच्छे दिन लो आ गए, बढ़ा आज विश्वास।।
जो गी रा सा रा रा

चूर चूर सबका हुआ , जो था उन्हें घमंड
जीते मोदी भाजपा, यू पी उत्तराखंड।।
जो गी रा सा रा रा

होली खेले भाजपा ,ले केसरिया रंग ।
डूब गये अखिलेश जी, जब राहुल के संग।।
जो गी रा सा रा रा

साईकल छूटी हाथ से ,हाथी भूला चाल ।
बाप बहू बबुआ बुआ, पप्पू है बेहाल ।
जो गी रा सा रा रा

मोदी मोदी की हवा ,मोदी की बौछार।
रंग सजेगा केसरी, होली का त्यौहार।।
जो गी रा सा रा रा

यू पी बेटों का मिलन ,था तूफानी मेल।
साइकल बही तूफान में, पप्पू फिर से फेल।।
जो गी रा सा रा रा

फुस्स हुई है  साईकलें , छूट गया है हाथ।
कमल खिलेगा केसरी, मोदी का ले साथ।।
जो गी रा सा रा रा

नोट बंदी को कर लिया, हँसकर आज कुबूल।
साईकल हाथी बेच सब, कर लो नोट वसूल ।।
जो गी रा सा रा रा

तूफानी बेटे बहे ,अम्मा अब्बा कूल ।
कमल कमल बस कमल ही, खिला कमल का फूल।।
जो गी रा सा रा रा

बादल सारे बह गए, खफा अभी पंजाब।
नशा ड्रग्स को ना कहो ,देकर कमल गुलाब ।।
जो गी रा सा रा रा 

Saturday, December 10, 2016

मेरी हार या मेरी जीत


याद है मुझे वो लम्हा 
जब वो बढ़ चला था 
जिंदगी की पगडंडियों पर 
पाने को अपना अंतिम लक्ष्य 
मैं देख रही थी सुनहरे सपने
उसके साथ जीने के 
मकसद तो एक ही था 
जीवन से मृत्यु का मिलन 
लेकिन
वो बहुत आगे निकल गया
मुझसे बिछुड़कर 
यही था मिलन                                     
जिंदगी की हार
मौत की जीत का
वो जीत गया था जिंदगी को हारकर 
मैं हार गई थी जिंदगी को जीतकर

              ... 9 दिसम्बर,2016
            यश जी की तीसरी पुण्यतिथि पर 

Sunday, October 9, 2016

अभिषेक के जन्मदिवस पर

जन्मदिवस शुभकामना, देता है परिवार।

चाचा, दादा ,माँ ,भुआ ,सभी लुटायें प्यार।।


आई है शुभ अष्टमी ,और जन्मदिन आज ।

रहे सदा ही आपका,हर पल शुभ आगाज|| 


सुनो हमारे लाड़ले ,सुनना देकर ध्यान।

जो करता सबका भला,उसको मिलता मान||


बनो सदा अभिषेक तुम,बनो सदा सम्मान।

रहो सदा परिवार की,शान, बान, अभिमान।।








सबको भाता है सदा, तेरा इस्टाईल।

तेरे सुन्दर बाल यह, तेरी इस्माईल।।


रहे सदा ही स्टाइल यह,रहे सदा अभिमान।

होंठों पर "अभिषेक" रख, सदा मधुर मुस्कान।।




भाई भाई साथ हो ,तो लेते जग जीत |
किस्मत वालों को सदा ,मिलता ऐसा मीत ||


सिर पर रखना हाथ अब, हे नाथों के नाथ |

'सोनी !, लीना ,हर्ष के,हरदम चलना साथ।।


पुलकित गर्वित मानसी, अकुल संग अभिषेक |
आगे ही आगे बढ़ो, रखो इरादे नेक ||
9 अक्तूबर ,2016..

Saturday, September 3, 2016

मैं यहाँ तू वहाँ [ गजल ]



यह वक्त.. ये दिन ... ये रात.... गुजर तो रहे हैं 
लेकिन गुजारे नहीं जाते ........ तुम्हारे बिन...


मैं यहाँ तू वहाँ, फासले दरमियाँ
आती जाती पवन ,कह रही दास्ताँ |


गुजरती ही नहीं, तेरे बिन जिंदगी 
इस जहाँ से परे ,बस गए तुम कहाँ |

ढूँढती है नजर, हरसू बेचैन सी
कुछ कहूँ चुप रहूँ, खो गया हमनवाँ |

सुलगती रोज है, आग दिल में पिया 
यादें मिटती नहीं ,चाहे जाओ यहाँ |

अश्कों में रात दिन,बहते जज्बात हैं 
ख्यालों में तुम मिले, मिट गई दूरियाँ | 

आ गए पास तुम, जी उठी धड़कनें 
कन्धे तेरे पे सर,रख करूँ मैं बयाँ |

तन्हा सरिता नहीं ,साथ अहसास हैं  
थाम लेना सनम,बन के फिर हमनवाँ |

Wednesday, August 24, 2016

राखी [कुण्डलिया]

कहती बहना वीर से , ह्रदय रखो ना खोट 
जल्दी लगवाओ तिलक, और दिखाओ नोट |
और दिखाओ नोट, फ़ोन है लेना भैया 
व्हाट्सएप्प उसमें चले ,पार लगे तभी नैया 
चैट करें सब दोस्त , देखती उनको रहती 
भैया सुनो गुहार ,प्यार से बहना कहती |

कच्चा धागा प्रेम का ,लाया पक्की प्रीत 
टीका करती है बहन ,गाकर राखी गीत 
गाकर राखी गीत ,बहन ने बाँधा धागा  
मन में पावन भाव , यूँ सोने पे सुहागा 
नेह भरी यह डोर , बाँधती रिश्ता सच्चा 
लाया सच्ची प्रीत ,प्रेम का धागा कच्चा ||
9 अगस्त, 2014.

Wednesday, August 17, 2016

रक्षाबंधन [दोहावली]


छुट्टी ले भाई गया ,राखी का त्यौहार 
भाई बहना हैं मिले, निश्चल पावन प्यार |

कैसे भला निभा सके, राखी का त्यौहार 
छूट गई है नौकरी ,महँगाई की मार |

राखी का त्यौहार है, सजे हुए बाजार 
बहना धागा बाँधती ,भाई करे दुलार ||

रंग बिरंगी राखियाँ ,कहती सदा पुकार 
कच्चे धागों में बंधा ,निश्चल पावन प्यार ||

रेशम की ले डोरियाँ, बहना बाँधे प्यार 
करती भाई को तिलक, राखी का त्यौहार |

कच्चा धागा प्रेम का ,लाया पक्की प्रीत 
टीका करती है बहन ,वीर निभाना रीत | 

निश्चल पावन भावना ,नेह भरी है डोर 
रक्षा करता बहन की ,मनवा नाचे मोर |
9 अगस्त, 2014.

Saturday, August 13, 2016

सावन दोहे

भीगा भीगा है समय,पहली है बरसात।
मानसून लो आ गया ,भीगे हैं जज्बात।।


सारी धरती खिल उठी ,खुश है आज विशेष 
सावन की बौछार से ,रहा नहीं दुख शेष ||

चमक दामिनी देखती ,धरती का क्या हाल 
सूखा कुछ अब ना रहा , बरखा किया निहाल ||

अन्नदाता किसान के, नैनों में थी पीर  
माल पुए के संग में ,बनी आज है खीर ||


आया सावन झूम के, नम है आज बयार
धरती का आँचल खिला,मिला उसे विस्तार ||

सावन देखो आ गया, लेकर शीतल भोर |
आँचल वसुधा का खिला ,हरियाली चहुँ ओर||
6अगस्त, 2016.