हमराही

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Friday, October 19, 2018

विजयादशमी मुक्तक

मुक्तक 
रावण पुतले गली गली में ,कब तक यूंही लगाओगे
हर काम ,काज ,व्यवहार में रावण कैसे इन्हें मिटाओगे
भस्म करो अंतस का रावण , विजयादशमी होगी तब
द्वेष,बुराई ,दंभ का रावण जब तुम रोज जलाओगे।।
19 अक्टूबर, 2018 

Tuesday, July 10, 2018

स्वच्छता गीत

सबसे सुंदर देश हमारा,विश्व को यह बतलाना है।
हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।

सोच बदलने देश बदलने एक मसीहा आया है
छोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया है
मातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना है
हाथ मिलाकर ...

खुद समझो सबको समझाओ महत्ता कूड़ा दान की
प्रबंधन से खाद बनाकर ,मदद करो किसान की
अपनी धरती सोना उगले,यह हमको बतलाना है
हाथ मिलाकर ...

पॉलीथिन का दामन छोड़ो,कपड़ा ,कागज अपनाओ।
गली गली हर शहर गाँव में शौचालय अब बनवाओ
वैभव शुचिता से आता है जन जन को समझाना है
हाथ मिलाकर ...

लहर चलेगी गली गली तब स्वच्छ भारत अभियान की
घर घर में जब चर्चा होगी कचरा,कूड़ा दान की
वातावरण को शुध्द बनाओ यह संदेश पहुँचाना है
हाथ मिलाकर ...

Thursday, October 5, 2017

शरद पूर्णिमा ( कुंडलिया )

झरती किरणों से सुधा, शरद पूर्णिमा रात।
शरदोत्सव ले आ गया,ऊर्जा की सौगात।।
ऊर्जा की सौगात, शरद चाँद स्वच्छ लाये
रखो रात में खीर , दिव्य औषध बन जाये
सरिता मिटते रोग,शक्ति ,धन, सेहत मिलती।
धवल चाँद,आकाश,सुधा किरणों से झरती ।।


Saturday, September 30, 2017

विजयादशमी (कुंडलिया)

आया उत्सव विजय का,विजयादशमी नाम।
आज दशानन मार कर ,बोलो जय श्री राम।।
बोलो जय श्री राम , हार कर चली बुराई 
महिषासुर को मार,आज जीती अच्छाई 
काम,क्रोध,मद, लोभ,अहम को अगर जलाया।
सरिता उस दिन मान,विजय उत्सव है आया।।

असली रावण मार कर ,मनुज स्वयं को जीत 
वचन निभाओ प्राण दे, लाओ रघुकुल रीत 
लाओ रघुकुल रीत, विजय का पर्व मनाओ
करो विसर्जन पाप ,पुण्य पताका चढ़ाओ
छोड़ो भ्रष्टाचार ,उतार मुखौटा नकली
सरिता पूजो शक्ति  ,दशहरा तब ही असली ।।

Thursday, September 28, 2017

महागौरी माँ ( कुंडलिया )

चम चम अष्टम रूप है, कर लो माँ का ध्यान।
उज्ज्वल मंगलदायिनी ,देती माँ वरदान
देती माँ वरदान ,महागौरी रूप धवल
शिवा,शाम्भवी नाम,गौर वर्ण पूरण नवल 
माँ के हाथ त्रिशूल,बजे है डमरू डम डम 
सरिता छाया ओज,चेहरा चमके चम चम ।।

कालरात्रि माँ ( कुंडलिया )

काली माँ है सातवाँ, दुर्गा जी का रूप।
शुभंकरी फलदायिनी ,इसका रूप अनूप
इसका रूप अनूप, विकट कालरात्रि माई
धनुष ,चक्र,गदा,बाण,केश फैलाकर आई
कृष्णा ,काली और , नाम त्रिनेत्री कराली
गर्दव हुई सवार ,पधारी निर्भय काली।।

कात्यायनी माँ ( कुंडलिया )


ध्याते षष्ठम रूप को ,देती है माँ शक्ति।
कल्याणी कात्यायनी,कर लो माँ की भक्ति।।
कर लो माँ की भक्ति,मनोवांछित है मिलता
एक हाथ तलवार,कमल दूजे में खिलता
मिट जाते संताप ,शरण माँ की जो आते
माँ का स्वर्ण समान, रूप जो सरिता ध्याते।।