हमराही

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Monday, September 25, 2017

कूष्मांडा देवी [ कुण्डलिया ]


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साधक करते साधना ,होते सफल प्रयास।
कूष्मांडा देवी करे, पूर्ण मनुज हर आस।।
पूर्ण मनुज हर आस, करे अष्टभुजा मैया 
होकर सिंह सवार, पार करती माँ नैया 
सरिता माँ के भक्त,नहीं विपदा से डरते 
रोग ,कष्ट से मुक्त,साधना साधक करते ||

चंद्रघंटा माँ ( कुण्डलिया )


मैया तेरा तीसरा ,उज्ज्वल है अवतार।
अर्ध चंद्र माथे सजा, घंटे का आकार।
घंटे का आकार,  चंद्रघंटा कहलाये
अस्त्र शस्त्र दस हाथ,पुष्प उज्ज्वल अति भाये
माँ से पा लो शांति,करो मत तेरा मेरा 
सरिता करे अर्पण,  दिया जो मैया तेरा।।

Sunday, September 24, 2017

ब्रह्मचारिणी देवी ( कुंडलिया )

मैया जी का दूसरा, ब्रह्मचारिणी रूप।
यह है तप की चारिणी,माँ का रूप अनूप।।
माँ का रूप अनूप ,बनी शिव की वो हाला
लिये कमंडल वाम, हाथ दायें में माला
तप संयम लो सीख, पार हो सरिता नैया
पूर्ण करे नवरात्रि , मुरादें दुर्गा मैया।।

शैलपुत्री देवी ( कुंडलिया)


अम्बे माँ का प्रथम दिन ,लाया शुभ आगाज।
रूप शैलपुत्री धरा, कर मैया पर नाज।।
कर मैया पर नाज, वृषभ वाहन बन आया
दायें हस्त त्रिशूल,कमल बायें अपनाया
उज्ज्वल शांति प्रतीक,विराजो माँ जगदम्बे
सरिता अविचल ज्ञान, सदा लाये माँ अम्बे ।।

नवरात्रि कुंडलिया

कर लो माँ की अर्चना, अश्विन का है मास।
आये फिर नवरात्र हैं,शुरू हुए उपवास।।
शुरू हुए उपवास, द्वार मैया के जाओ
करे मुरादें पूर्ण, झोलियाँ भर के लाओ
लो चरणों की धूल, ध्यान मैया का धर लो
रखकर शुभ उपवास, अर्चना सरिता कर लो ।।
                   . . . 22सितंबर,2017

Monday, August 7, 2017

रक्षाबंधन ( दोहे)


राखी कह या श्रावणी, पावन यह त्योहार।
कच्चे धागों से बँधा ,भाई बहन का प्यार।।

थाली लेकर शगुन की,बहन सजाये भोर।
रोली से टीका किया, बाँधी रेशम डोर।।

रेशम की ये डोरियाँ , कच्चे धागे चार।
सच्चा रिश्ता प्रीत का, निश्छल पावन प्यार।।

धागे कच्चे हैं मगर, लेकिन पक्की प्रीत।
बहना से भाई कहे, हम बचपन के मीत।।

राखी का त्योहार यह, बाँटे केवल नेह।
बेटी चल ससुराल से , आई बाबुल गेह।।

देते जो कुर्बानियाँ , होते हैं जाँबाज।
बाँधो उनको राखियाँ ,रखते हैं जो लाज।।

एक वचन मैं माँगती, भैया तुमसे आज।
रक्षा कर माँ बाप की, रखना कुल की लाज।।

देती हूँ भैया वचन, मैं भी तुमको आज।
सास ससुर माँ बाप सम, समझ करूँगी नाज।।

हरियाली चहुँ ओर है,धरा किया शृंगार।
रहे मुबारक आपका, राखी का त्यौहार।।
        7अगस्त,2017 सोमवार





Sunday, July 9, 2017

गुरु पूर्णिमा (दोहे)

गुरु पूर्णिमा 9 जुलाई, 2017
शुक्ल पक्ष आषाढ़ का,गुरु पूजा दिन खास।
लाई है गुरु पूर्णिमा,श्रद्धा और विश्वास।।

देकर गुरु को दक्षिणा,सदा निभाओ प्रीत।
जीवन के गुर जान कर, बनना सच्चे मीत।।

नमन करो हर रोज ही,जो गुरु मानो आप।
गुरु की महिमा जान लो ,गुरु दूजे माँ,बाप।।

जन्म दिया माँ बाप ने, देकर शुभ संस्कार।
गुरु सँवारता ज्ञान से,  देकर उच्च विचार।।

नमन करें गुरु आपको, देना आशीर्वाद।
ज्ञान,मान, सम्मान पा, ह्रदय खिले आह्लाद।।

मम हार्दिक शुभकामना, करो आप स्वीकार।
आई
    ........ सरिता यश भाटिया ..........