हमराही

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Saturday, March 2, 2013

'नयन,ह्रदय,प्रीत'


प्रथम प्रयास दोहा लिखने का गुरु जी एवं अरुण के अथक प्रयास के साथ 
कृपया गलती निसंकोच बताएं ...... 

नयन मिलें जब आपसे ,पुष्प ह्रदय खिल जाय
 मन का पंछी उड़ चला ,कछु भी नही सुहाय

मन पंछी जो उड़ गया  ,फिर काहे पछताय
ह्रदय  प्रेम  क्यों गोरिया ,नयनों से छलकाय  

नयन मिला कर कृष्ण से, करले सच्ची प्रीत।
इस झूठे संसार में, नहीं कृष्ण सा मीत ।।