हमराही

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Wednesday, June 5, 2013

सूखे पर दोहे



धरती के चिथड़े हुए ,जल बिन सब बेजान |
खाली बर्तन ले सभी ,भटक रहे इन्सान ||

गर्मी से सूखा बढ़ा , जल की हाहाकार |
अफरा तफरी है मची ,प्यासे है नर नार ||

ताल भये सूखे सभी, पारा बढता जाय | 
खाली गागर ले फिरे, पानी नजर न आय ||



मिनरल वाटर कंपनी ,धार रूप विकराल |
पानी सारा ले उडी ,जन जन है बेहाल ||