हमराही

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Friday, August 30, 2013

हमसे नफ़रत न हुई उनसे मुहब्बत न हुई [गजल]

2122   1122   1122   112
आदमी मौन हुआ राज छुपाये न बने 
चीख आकाश उठा आज सुनाये न बने|

हमसे नफ़रत न हुई उनसे मुहब्बत न हुई
क्या बने बात जहां बात बनाये न बने |

यार है यार बना साथ मुलाकात रहे 
कब रहे यार अगर साथ निभाए न बने |

ज्ञान को बाँट अगर चाह तुझे बढने की 
जो रखे पास हुनर ज्ञान बढाये न बने |

क्या पता वोह कभी थाम सके बाहों में 
इसलिए साथ चले हाथ हटाए न बने |

शाम जो आँख मिली हाल बताते रहे 
आँख जो आज उठी हाल सुनाये न बने |
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