हमराही

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Saturday, October 12, 2013

मैया दोहे

उजली उजली भोर से ,चित छाया उल्लास 
वंदन करती मात मैं ,हृदय बनाओ वास //

सारा ही संसार है ,शरणागत हो जाय
नमन करूँ मैं मात को, खुशियाँ आँगन लाय// 

हम हैं अम्बे मात के ,निज चरणों की धूल 
आओ मिलकर मात को ,भेंट चढ़ाएं फूल// 

मैया के नवरात्र में, सजे हुए दरबार
मैया के दरबार की, महिमा अपरमपार //

दर पर आकर मात मैं, तुझे सुनाऊँ टेर 
शक्ति स्वरूपा कालिका,दे दर्शन चढ़ शेर //

दर पर तेरे हूँ खड़ी , नतमस्तक कर जोड़ 
सर पर रखना हाथ माँ , दुख जाएँ दर छोड़//

नवरात्रों में पूजना , दुर्गा के नौ रूप
अम्बे मैया दुख हरो,अब धर शक्ति स्वरूप //

रंग बिरंगी चुनरियाँ, सजा हुआ दरबार
हर्षित मन मेरा हुआ, पुलकित सब संसार //

मैया के दरबार से, होती शुभ शुरुआत 
दर पर माथा टेक लो, दिन हो चाहे रात /

नमन करे हर रोज जो ,मैया लेती थाम 
बन जाते हैं आपके, बिगड़े सारे काम / 
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