हमराही

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Friday, March 21, 2014

अकेलापन [कुण्डलिया]

बैठ अकेले सोचती ,तुमको दिन और रात 
जान हमारी ले गए ,बहते हैं जज्बात /
बहते हैं जज्बात सजल हैं आँखें रहती
टूटा है विश्वास, हर निगाह यही कहती 
तुम बिन हैं सुनसान सभी दुनिया के मेले 
सरिता रही पुकार, हर रोज बैठ अकेले //
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