हमराही

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Tuesday, June 17, 2014

मेरे ख्याल

अक्सर मेरे ख्यालों में
जब भी तुम होते  हो मेरे पास
सिर्फ मुझे सुनते हो
कहते हो अपने दिल की बात
तब सारा जहाँ सिमटा लगता है मुझे
तुझ में कहीं
तभी जैसे कोई
छीन ले जाता मेरे दिल का चैन
कर जाता मुझे बेचैन
जैसे कोई तुझको चुरा ले जाता मुझसे
तोड़ कर मेरे ख्यालों का घेरा
और रह जाती 
मैं और मेरी तन्हाई 
इक टीस लिए मन में 
कुछ खालीपन 
कुछ खो देने की बेचैनी 
मिलता मुझे वापिस 
मेरा खोया सुकून 
तेरी एक झलक 
तेरी कोई खबर पा लेने के बाद