हमराही

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Saturday, February 28, 2015

किताबे जिंदगी खोलूँ पलों में मुस्कराना तुम [गजल]

किताबे जिंदगी खोलूँ पलों में मुस्कराना तुम 
वो सूखे पुष्प सा बनकर सदा यादों में आना तुम |

तमस को जिंदगी से दूर कर के रोशनी बनना
सुबह की ओस बनकर अब सदा ही खिलखिलाना तुम |


जो जीना देर से सीखे, वो जीवन राग क्या जाने 
सभी लम्हे समेटे जिंदगी का राग गाना तुम |

कभी जो जीतना हो जीतना खुद को ही तुम लेकिन 
वफा के वास्ते फिर जीत सरिता हार जाना तुम |

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