हमराही

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Monday, December 31, 2012

.....''क्योंकि लड़की हूँ मैं''......

दोस्तो अभी तक सकारात्मक रचनाएँ लिखती आई हूँ,दामिनी की निर्मम हत्या के बाद एक नकारात्मक रचना लिखी है! अजन्मी बेटी के और माँ के अंतर्द्वंद को दर्शाती रचना...




माँ मुझे इस दुनिया में ना लाना

बेदर्द हैं रिश्ते बेदर्द है जमाना



डर लगता है पिता और भाई से

सुना है वो भी कम नही कसाई से



अभी तो छुपी हूँ आँचल की छाँव में

कल हो जायूंगी जूती किसी पाँव में



घर में तो तुमने मुझे है बचाया

बाहर कहाँ पा सकूँ तेरी मैं छाया



कैसे थाम लूँ किसी दोस्त का हाथ

कब हो जाए वो बेदर्द दुनिया के साथ



डॉक्टर के छूने से लगे डर कैसा

है जो मेरे भाई पिता के जैसा



शायद नहीं सुरक्षित अब तेरी ही बाहों में

'क्योंकि लड़की हूँ मैं' दुनिया की निगाहों में



सुन मेरी विनती मुझे दुनिया में नही लाना

मुश्किल है यहाँ चैन की साँस ले पाना



अगर 'सरिता' तुमने बेटी को है बचाना

तो पड़ जाएगा उसे भी 'दामिनी' बनाना



आओ इस दुनिया को बेटी से खाली बनाएँ

'बेटी बचाओ' नही हम 'भ्रूण हत्या' अपनाएँ


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14 comments :

  1. बहुत सही बात कही है आपने .सार्थक भावनात्मक अभिव्यक्ति शुभकामना देती ''शालिनी''मंगलकारी हो जन जन को .-2013

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    1. शालिनी जी हौंसला अफ़साई के लिए शुक्रिया, मार्गदर्शन करते रहें

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  2. संवेदनशील रचना, हम कब सुधरेंगें आभार

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  3. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. द्वेदी जी आपको भी नववर्ष की मंगलकांनाएँ

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  4. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं. सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

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    1. Shikha ji shukriya mere blog par visit karne ke liye plz keep visiting

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    2. Shikha ji shukriya mere blog par visit karne ke liye plz keep visiting

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    3. Shikha ji shukriya mere blog par visit karne ke liye plz keep visiting

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    4. This comment has been removed by the author.

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  5. ऐसे हालात में तो प्रश्नचिह्न उठना स्वाभाविक है!
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    बहुत सार्थक प्रस्तुति!

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  6. बहुत सार्थक प्रस्तुति :)

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