हमराही

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Friday, July 12, 2013

प्रकृति [आल्हा छंद]


कटाव रुके तो पानी रुके, कुपित नहीं होंगे भगवान 
बरखा रानी छम छम बरसे, ख़ुशी मनाएगा इन्सान 
रूद्र ,सोन ,बद्री, केदार में , भोले शंकर करें विश्राम
हँसते गाते यात्रा करते, होकर आते चारों धाम 


ओजोन की परत बचालो ,रक्षक छतरी है बदहाल
गलोबल वार्मिंग को हटादो ,धरती को करके खुशहाल
पेड़ लगालो धरा बचालो ,देदो कुदरत को संकेत
खिल जायेगी उजड़ी धरती ,लहलहाएंगे तभी खेत   
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