हमराही

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Friday, September 20, 2013

कुण्डलिया [प्यार]

कर लो सब से दोस्ती, छोड़ो अब तकरार 
जीवन है दिन चार का ,बांटो थोड़ा प्यार //
बांटो थोड़ा प्यार, यही है दौलत असली 
प्यार स्नेह को मान ,और सब ही नकली 
धन दौलत सब छोड़ ,प्यार जीवन में भर लो   
रहे कोई न गैर ,सब से दोस्ती कर लो //
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