हमराही

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Saturday, September 7, 2013

कभी कभी तुम खुश रहने का ना कोई कारण पाते हो

अंग्रेजी में एक सन्देश आया था मेरे फ़ोन में उसी को रचना का आकार दिया चंद अपने शब्दों को भी जोड़कर 


जब कभी सीमा पर 
एक सिपाही सोता है,
अपनों को याद कर 
वो चुपके से रोता है|

कहीं पर कोई माँ 
एक आह भरती है,
नवजात शिशु की आँखें 
ना खुलने से डरती है|

कहीं पर एक गरीब बाप 
चुपके से रोता है,
जब उसका बेटा एक टुकड़ा 
रोटी के लिए रोता है|

कहीं पर एक लड़की 
अनाथालय में उदास है,
क्योंकि उसके माँ बाप
आज न उसके पास हैं|

कभी कभी तुम खुश रहने का 
ना कोई कारण पाते हो,
पर अपने आपको बहुतों से 
कुछ ज्यादा ही खुश पाते हो |

सीख सको तो अपने से नीचे 
देख के जीना सीख , 
शोहरत के पीछे भागो तो 
नहीं मिलेगी भीख ||
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