हमराही

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Tuesday, September 10, 2013

''निर्माता''

सृष्टि का निर्माण किया रचकर यह संसार 
ब्रह्मा को करते नमन ,पहले रचनाकार // 

मात पिता को है नमन, दूजे रचनाकार 
आदर औ' सम्मान से, देना उनको प्यार //

गुरु निर्माता एक है, देता सच्चा ज्ञान
जीवन उससे है बना, उससे से है पहचान //

जीवन 'गर संवारना,सच्चा गुरु लो खोज 
माली बन जो शिष्य का ,उसे सींचता रोज //

रंग बिरंगे फूल हैं ,बगिया की पहचान 
बनकर गुरु रक्षक मगर ,डाले इसमें जान //

सुधार दे कच्चा घड़ा , ठोक थपक कुम्हार 
गुरु संवारे शिष्य को, दे डांट और प्यार //

करे देश निर्माण जो ,भविष्य सदा सुधार 
गुरु सा निर्माता नहीं, करलो यह स्वीकार //

निर्माता तुम भी बनो, पेड़ लगाओ यार 
धरती को संवार दो , इसका कर शृंगार //

युग निर्माता हैं सभी, धरती के वो लाल 
आजादी सौगात दी , रखो इसे संभाल //

निर्माताओं को सभी ,करबद्ध है प्रणाम 
जीवन तुम संवार लो ,करके अच्छे काम // 
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