हमराही

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Monday, October 14, 2013

तुम जीवन का आधार प्रिय

तुम अमर बेल सी लिपटी हो
मैं हरा पेड़ फलदार प्रिय/

तुम बिन लगता बैरागी सा 
तुम लाई स्वर्ण बहार प्रिय/

संग सारी उमरिया चलना है 
तुम पर सब दूँ मैं वार प्रिय/

तुम मेरी धड़कन मैं दिल तेरा
तुम पे जीवन निसार प्रिय/

मैं दिया अगर हूँ बाती का 
तुम दिए में तेल की धार प्रिय/

तुम सरिता हो मैं सागर हूँ 
तुमसे पाता जलधार प्रिय/

तुम माउस हो मैं लैप्पी हूँ 
तुम बिन चलना दुश्वार प्रिय/

तुम सिम कार्ड मैं स्मार्ट फ़ोन 
तुम जीवन का आधार प्रिय/

तुम मायके जाकर बैठ गई 
तुम बिन जीवन बेकार प्रिय/

न कपडें धुलें न चूल्हा जले
तुम बिन सूना घर द्वार प्रिय/

तुम शमा अगर मैं परवाना
मैं मिटने को बेकरार प्रिय/
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