हमराही

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Sunday, November 17, 2013

साथी तेरे बिन

लगे हुए थे दुनिया के मेले 
बिन तेरे हुए हम भी अकेले|

सामने थे तुम पर थे बहुत दूर 
जिद्द ने हमें भी किया मजबूर |

न तुम पास आए न मैंने बुलाया
अहम् तेरा भी आज आड़े आया|  

हंसी से था दिल का दर्द छुपाया 
तन्हाइओं में तुमने बहुत रुलाया| 

सोचा था होगा अपना हमेशा साथ 
शायद आखिरी थी यह मुलाकात|

दिल के द्वार खुले हैं चले आना 
मिलने न देगा यह बेदर्द ज़माना|

पलकें तेरे इंतज़ार में खुली रहेंगी
तेरे दीदार बिन हमें मरने न देंगी || 

साथी तेरे बिन बहुत अधूरे हैं हम 
तुम जो चले आओ तो पूरे हैं हम 
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