हमराही

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Monday, March 3, 2014

बिटिया

बिटिया ना अपनी हुई ,कैसा रहा विधान 
राजा हो या रंक की, बिटिया सभी समान ।
बिटिया सभी समान ,रहेंगी सदा बेगानी
छोड़ेगी वो गेह, रीत पड़ेगी निभानी 
चाहे गेह अमीर या, रही गरीब की कुटिया 
सरिता कहती मान, पराई होती बिटिया।।
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