हमराही

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Sunday, March 30, 2014

रिश्ते [कुण्डलिया]

रिश्ते बनते प्यार से ,मत करना तकरार 
खुशियाँ बसती हैं यहाँ, चहक उठें परिवार |
चहक उठें परिवार, सभी जो मिलझुल रहते
मुश्किल करते दूर ,सुख दुःख मिलकर सहते
सुदृढ बने परिवार ,तो बसें वहाँ फरिश्ते 
तनिक न रहे खटास ,बनाना ऐसे रिश्ते ||
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