हमराही

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Wednesday, May 14, 2014

धड़कन [दोहावली]


दिल पर काबू ना रहे मिल जाते जो नैन 
धड़कन धड़कन से मिले दिल को मिलता चैन |

दिल की यह मजबूरियाँ समझे कोई ख़ास 
धड़कन बढ़ जाती अगर आता है वो पास |

तेरी धड़कन के बिना मेरी भी बेकार 
दोनों की मिलती अगर नैया लगती पार |

तेरी धड़कन के सिवा कुछ भी ना अनमोल 
सूना है सारा जगत इसका क्या है मोल |

धड़कन से चालू हुआ धड़कन पर सब बंद 
मोल समय का जान लो यह इसकी पाबंद |

धड़कन चलती है अगर जीने की हो आस 
अपनों का जो साथ हो बढ़ता है विश्वास |

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