हमराही

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Friday, October 24, 2014

आओ मिलकर दीप जलायें

आओ मिलकर दीप जलायें 
अंधकार को दूर भगायें


जगमग जगमग हर घर करना 
अन्धकार है सबका हरना 
अम्बर से धरती पर तारे 
साथ चाँद को नीचे लायें |

अंतर्मन का तमस हरेंगे 
कलुषित मन में प्रेम भरेंगे 
द्वेष,बुराई और वासना 
मिलकर सारे दूर हटायें |

उत्सव है यह दीवाली का 
सुख समृद्धि और खुशहाली का 
भेदभाव आपस के भूलें 
मन में शांति दीप जलायें |

दीपों की पंक्तियाँ जगाई 
धरती अपनी है चमकाई 
सद्ज्ञान के दीप जलाकर 
अंतर्मन का तिमिर मिटायें  |


आपस में सब भाई भाई 
खुशियाँ बाँटें और मिठाई 
दीवाली के उजियारे से 
हर कोना रोशन कर आयें |

लाया समय ख़ुशी की घड़ियाँ 
मन में फूटी हैं फुलझड़ियाँ 
दीन दुखी को गले लगाकर 
उनसे पा लो खूब दुआयें ||