हमराही

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Saturday, June 18, 2016

आरक्षण


आरक्षण का भूत फिर,लाया है भूचाल।
भूले सब इंसानियत, बुनते हैं नित जाल।। 


आरक्षण की रेवड़ी ,ले घूमें चहुँ ओर |
मौसेरे भाई सभी ,और सभी हैं चोर || 


भारत मेरा जल रहा , कैसा मचा बवाल।
नेता देखें वोट को ,जनता है बेहाल।।

आरक्षण के नाम से,बाँटो मत अब देश |
यहाँ बसें इंसान सब,लिए अलग परिवेश ||

आरक्षण दिव्यांग को,या दो किसी अनाथ।
जात धर्म को छोड़कर ,दो गरीब का साथ।।
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