हमराही

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Sunday, December 29, 2013

यूँ लगे मुस्कराये जमाना हुआ

जब से श्वासों का फिर से न आना हुआ  
ख़त्म जीवन का तब से तराना हुआ /

इस कदर चाहता मेरा दिल है तुझे  
हार कर तेरा ही अब खजाना हुआ / 

भूल कर बेवफ़ा हो गया अजनबी   
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ /

जो किया सामना है दुखों का अभी   
यूँ लगे मुस्कराये जमाना हुआ /

तोड़ना अब न विश्वास तुम फिर कभी 
दिल हमारा है सबका निशाना हुआ / 

बेटियाँ हो विदा मायके से गईं   
पति का घर भी न लेकिन ठिकाना हुआ /

जोड़ता यूँ है किसके लिए आदमी 
खाली ही हाथ जग से रवाना हुआ /
.        ..............सरिता