हमराही

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Wednesday, August 13, 2014

कुछ ऐसे भी दोस्त

अगर तुमने किया होता मुझसे सच्चा प्यार
बिन सोचे ही अपना जीवन देते मुझ पर वार
यह प्यार इक बहाना था
तुझको मेरे पास आना था
इसलिए तुमने मेरी भावनाओं संग खेला
मतलब ना निकलने पर छोड़ा मुझे अकेला
दोस्त खुद को कहकर भी दुश्मनी खूब निभाई है
जिसको कभी ना हम भूलें ,की ऐसी बेवफाई है
तेरे दिए वचनों को हम जाएँ कैसे भूल
इस दुनिया में मिलते नहीं हैं काँटों के बिना फूल
माना की कहा था ,पग पग चलेंगे साथ
सुख दुःख जैसे भी आये ,छूटेगा ना हाथ
जात से खुद को कहते तुम इंसान हो
दोस्त तुम महान हो
दोस्त तुम महान हो