हमराही

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Thursday, July 23, 2015

तुम्हारा अहसास

बंद करो अपनी पलकें
रखो अपना दायाँ हाथ
बायें तरफ सीने पर
महसूस करो मुझे
अपनी धड़कन में
हर पल हर दम
साथ हूँ तेरे
पास हूँ तेरे
कितने विश्वास से कहते थे
जब भी
मन बहुत उदास होता
तुमसे मिलने को तड़प उठता
तुम ऐसे ही बहला देते हमेशा
तुम्हे याद है ना 'जाना '
मैं पगली
पलकें मूंदे
बैठी रहती
डरती थी
खो ना दूँ कहीं
तुम्हारे अहसासों को
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कब तक यूँही बहलाते रहोगे बाबू