हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

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Friday, July 12, 2013

प्रकृति [आल्हा छंद]


कटाव रुके तो पानी रुके, कुपित नहीं होंगे भगवान 
बरखा रानी छम छम बरसे, ख़ुशी मनाएगा इन्सान 
रूद्र ,सोन ,बद्री, केदार में , भोले शंकर करें विश्राम
हँसते गाते यात्रा करते, होकर आते चारों धाम 


ओजोन की परत बचालो ,रक्षक छतरी है बदहाल
गलोबल वार्मिंग को हटादो ,धरती को करके खुशहाल
पेड़ लगालो धरा बचालो ,देदो कुदरत को संकेत
खिल जायेगी उजड़ी धरती ,लहलहाएंगे तभी खेत   
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Thursday, July 11, 2013

प्रलय या आपदा [आल्हा छंद ]



रूद्र रूप ले आए भोले ,मचा प्रलय से हाहाकार 
मानव आया कुदरत आड़े,उजड़ गए लाखों परिवार
यहाँ जिन्दगी चहका करती,अब हैं लाशों के अम्बार 
दोहन लेकर आया विपदा,हम मानस ही जिम्मेवार 

उमड़ घुमड़ बादल जो आए,छम छम कर आई बरसात
ध्वस्त हुए सब मंदिर मस्जिद,दिन में ही हो आई रात  
कुदरत हुई खून की प्यासी, प्रलय मचा है चारों ओर
कुपित शिवा जलमग्न हो गए,आया है कलयुग घनघोर