हमराही

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Thursday, March 12, 2015

धागा ,डोर दोहे

कच्चे धागे प्रीत के ,कोई सके न तोड़
है अदृश्य बंधन मगर,दें बंधन बेजोड़ |

देता आशीर्वाद है ,मात पिता का प्यार 
जिस धागे से हम बँधे,ममता की वो तार | 

कच्चा धागा है मगर, लाया सच्ची प्रीत  
बहन सूत्र है बाँधती,गाती मंगल गीत |

पति पत्नी जिससे बँधे, कहें डोर विश्वास 
सुख दुख के साथी बनें, बंधन बनता खास |

दोस्ती का बंधन गजब,है जीवन पर्यन्त 
प्रीत और विश्वास का, यहाँ कभी ना अंत |

साँसों की ये डोर को,समझो प्यारे मीत  
छदम कपट से दूर रह, गाओ जीवन गीत |

साँसों की इस डोर से ,बँधा मनुज इठलाय 
नहीं भरोसा साँस का ,जाने कब थम जाय |