हमराही

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Thursday, September 28, 2017

कालरात्रि माँ ( कुंडलिया )

काली माँ है सातवाँ, दुर्गा जी का रूप।
शुभंकरी फलदायिनी ,इसका रूप अनूप
इसका रूप अनूप, विकट कालरात्रि माई
धनुष ,चक्र,गदा,बाण,केश फैलाकर आई
कृष्णा ,काली और , नाम त्रिनेत्री कराली
गर्दव हुई सवार ,पधारी निर्भय काली।।

Wednesday, October 28, 2015

नवरात्रि दोहावली 2.


भाग 1.

पंचम दुर्गा रूप को ,कहें स्कन्ध की मात।
मोक्ष द्वार होता सुलभ,दर्शन जब हो जात।।
मानव चोला है कठिन ,करना नहीं ग़ुरूर।
उपासना माँ की करो,यश बल मिले जरूर।।




छठा रूप कात्यायनी ,करो प्रेम से भक्ति।
रोग द्वेष को नष्ट कर ,देती है माँ शक्ति।।
माँ के शक्ति रूप का,करो ह्रदय से ध्यान।
मनोकामना पूर्ण हो ,मिले मान सम्मान।।



कालरात्रि माँ सातवीं ,करे काल का नाश।
फलित होय शुभ साधना,भय का होय विनाश।।
रंग बिरंगी चुनरियाँ ,सजा हुआ दरबार।
वैर भाव को छोड़कर ,पा लो माँ का प्यार।|



रूप महागौरी धरा ,वर्ण पूर्णता गौर।
संभव होते कार्य सब,जब पहुँचें माँ ठौर।।
माँ चरणों में बैठकर ,शुरू किये उपवास।
देना आशीर्वाद माँ ,आया तेरा दास।।
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