हमराही

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Sunday, July 2, 2017

बेटी,बेटा, बहू (दोहावली)

किया बुढ़ापे के लिये, सुत लाठी तैयार।
बहू उसे लेकर गई, बूढ़े ताकें द्वार।।

बहू किसी की है सुता, भूले क्यों संसार।
गेह पराये आ गई ,करो उसे स्वीकार।।

किया बुढ़ापे के लिये, बेटा सदा निवेश।
पर धन बेटी साथ दे , बेटा गया विदेश।।

बहू अगर माँ मान ले ,बोझ लगे ना सास।
घुलमिल ही परिवार में ,रिश्ता बनता खास।।

सुघड़ बनें रिश्ते सदा, तभी समझ लो आप।
सास ससुर को जब बहू  ,समझेगी माँ बाप।।

बेटी दो घर जोड़ती, बेटी है संस्कार।
बहू बने बेटी अगर, सुखी रहे परिवार।।

आँख खुली इंतज़ार में,लिये मिलन की आस।
वृद्धाश्रम में ले रही ,मात आखिरी श्वास।।
 .. 2जुलाई,2017

Wednesday, August 3, 2016

रिश्ते हैं सब नाम के [दोहावली]


पति पत्नी यूँ आजकल, करते हैं गुड फील।

रिश्ते हैं सब नाम के, होती केवल डील।।

बेटा कहता बाप से ,फ्यूचर मेरा डार्क। 
रास न आये इण्डिया ,जाना है न्यूयार्क।।

बेटी कहती माँ सुनो,तुम तो रही गँवार।
पढ़ लिख कर हम क्यों भला ,समय करें बेकार।।

मात पिता देते सदा,जिनको आशीर्वाद।
वृद्धाश्रम वो भेजती ,नालायक औलाद।।

छः बच्चे भी पालकर, करते थे तब राज।
एक एक बच्चा अभी ,माँ बाप मोहताज।।
5 जुलाई,2016..