हमराही

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Saturday, August 13, 2016

सावन दोहे

भीगा भीगा है समय,पहली है बरसात।
मानसून लो आ गया ,भीगे हैं जज्बात।।


सारी धरती खिल उठी ,खुश है आज विशेष 
सावन की बौछार से ,रहा नहीं दुख शेष ||

चमक दामिनी देखती ,धरती का क्या हाल 
सूखा कुछ अब ना रहा , बरखा किया निहाल ||

अन्नदाता किसान के, नैनों में थी पीर  
माल पुए के संग में ,बनी आज है खीर ||


आया सावन झूम के, नम है आज बयार
धरती का आँचल खिला,मिला उसे विस्तार ||

सावन देखो आ गया, लेकर शीतल भोर |
आँचल वसुधा का खिला ,हरियाली चहुँ ओर||
6अगस्त, 2016.

Saturday, July 11, 2015

सावन के झूले [कुण्डलिया]

सावन के झूले हुए, सभी पुराने खेल 
व्यस्त सभी हैं नेट पर, करते हैं ई मेल |
करते हैं ई मेल, भूल के गिल्ली डंडा 
भूले कुश्ती ,दौड़,नेट का आया फंडा 
दिन भर करते चैट,सभी रिश्ते हैं भूले 
सरिता कहती झूल, लगे सावन के झूले ||
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