हमराही
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Friday, October 19, 2018
Monday, September 14, 2015
Thursday, May 14, 2015
अब शोहरतें अपने नाम लिखें
आओ नए आयाम लिखें
नवयुग का पैगाम लिखें
बदनामियों से वास्ता बदस्तूर चला
अब शोहरतें अपने नाम लिखें ||
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Tuesday, March 18, 2014
मुक्तक [ नारी]
अम्बे काली दुर्गा माता सब नारी कहलाती
कन्या पूजन के दिन घर घर नारी पूजी जाती
क्यों कन्या को पैदा करके घबराती है नारी
सरे आम चौराहे में क्योंकि वो है लुट जाती
मानसिकता यह कैसी जो नर पर है अब भारी
माँ बहन या बेटी सबकी भी तो है इक नारी
बेटा बेटी को बराबर का मान अगर दिलाएं
नर सम्मान दे नारी को नारी भी जाये वारी
आओ अब तो इस समाज में इन्कलाब हम लायें
नारी को हम घर समाज में अब सम्मान दिलायें
बाल बाला को शिक्षित कर दूर करें दहेज़ की प्रथा
अपनी बेटी को भेज सुरक्षित सबकी बेटी अपनायें
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Friday, January 31, 2014
मुक्तक [बेटी]
[1]
हर कोई चाहता ऐसा बेटा जिस पर उसको मान हो
बेटी चाहिए लक्ष्मी जैसी जिससे घर का सम्मान हो
खुद नहीं बनना चाहता कोई भक्त सिंह,झाँसी की रानी
हर कोई चाहता एक भक्त सिंह जो देश लिए कुर्बान हो /
[2]
झाँसी,लक्ष्मी,दुर्गा बनो पर नहीं तुम दामिनी बनना
मत ढूंढो तुम भक्त सिंह खुद भक्त सिंह बनना
आशा कैसी दूसरों से खुद ही अगर तुम जागो
खुद को समझो आम क्यों आप को ख़ास है बनना /
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Tuesday, October 29, 2013
मुक्तक
जो कह ना सके,वो समझ लो जाना
जाने फिर कब हो तुम्हारा यूँ आना
दिल के आगे तो झुकना ही पड़ेगा
हम नही रोकें तो खुद ही रुक जाना
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Tuesday, September 24, 2013
फिर हंसता है चेहरा तो क्यों यह मन रोता है?
चेहरे की मुस्कुराहट पर ना जाओ जनाब
यह तो है रोते हुए दिल का नक़ाब
कहते हैं लोग कि चेहरा मन का दर्पण होता है
फिर हंसता है चेहरा तो क्यों यह मन रोता है?
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Monday, September 23, 2013
मुक्तक
1.
कोई छू जो गया था तो बाकी है अहसास
जाने वो कौन था जिसपर दिल को था विश्वास
सब कह रहे थे, वो कोई तेरा अपना था
आँख जब खुली तो जाना,वो तो इक सपना था
2.
खुली आँख से देखा है मैने इक सपना
नही है कोई और वो है कोई मेरा अपना
बनाए रखना तुम वो अपने का अहसास
नही कभी भुलाना कि तुम हो मेरे ख़ास
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Saturday, September 21, 2013
दिल है अपना पर प्रीत क्यों पराई
मिलन के साथ हे प्रभु कैसी यह जुदाई
दिल है अपना पर प्रीत है क्यों पराई
मिलन जुदाई की क्यों रीत यह बनाई
मुश्किल है देना किसी अपने को विदाई
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Wednesday, September 18, 2013
मुक्तक
कहाँ आस लगाए हो प्यारे,यहाँ गुंगे और बहरे रहते हैं
कभी थी ,सोने की चिड़िया आज इसे इंडिया कहते हैं
पेड़ों की आवाज़ सुन सके चाहिए ऐसा दीवाना दिल
कर दे जां भी न्योछावर जो उसे देशभक्त कहते हैं
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Thursday, August 1, 2013
मुक्तक
१.काश! उसको हमने यूँ गले से लगाया होता,
अपने धड़कते दिल का हाल बताया होता!
कह देती बस धड़कनें,जो ना कह पाए हम,
समझ ही लेता वो बस फिर क्या था गम !!
२.अगर नही समझ पाता तो होता उसे अहसास,
कितना मुश्किल है खोना और पाना विश्वास!
प्यार के अहसास भी होते हैं क्या अजीब?
जो समझे वो अमीर,जो खो दे वो ग़रीब !!
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