हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

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Saturday, September 3, 2016

मैं यहाँ तू वहाँ [ गजल ]



यह वक्त.. ये दिन ... ये रात.... गुजर तो रहे हैं 
लेकिन गुजारे नहीं जाते ........ तुम्हारे बिन...


मैं यहाँ तू वहाँ, फासले दरमियाँ
आती जाती पवन ,कह रही दास्ताँ |


गुजरती ही नहीं, तेरे बिन जिंदगी 
इस जहाँ से परे ,बस गए तुम कहाँ |

ढूँढती है नजर, हरसू बेचैन सी
कुछ कहूँ चुप रहूँ, खो गया हमनवाँ |

सुलगती रोज है, आग दिल में पिया 
यादें मिटती नहीं ,चाहे जाओ यहाँ |

अश्कों में रात दिन,बहते जज्बात हैं 
ख्यालों में तुम मिले, मिट गई दूरियाँ | 

आ गए पास तुम, जी उठी धड़कनें 
कन्धे तेरे पे सर,रख करूँ मैं बयाँ |

तन्हा सरिता नहीं ,साथ अहसास हैं  
थाम लेना सनम,बन के फिर हमनवाँ |

Saturday, August 6, 2016

अच्छा लगता है [ गजल ]

1222         1222    1222
यूँ तेरा मुस्कुराना अच्छा लगता है 
झुकी नजरें चुराना अच्छा लगता है

दिलों को जीतना फितरत सही मेरी  

क्यों तुमसे हार जाना अच्छा लगता है

भरा दामन है मेरा काँटों से लेकिन 

सुमन सा मुस्कराना अच्छा लगता है 

तू वादे तोड़ दे यह तेरी है मर्जी

मुझे वादे निभाना अच्छा लगता है

न भाये छाँव भी महलों की तेरे बिन 

मुझे दिल आशियाना अच्छा लगता है 



हो मेरी जान तुम रूठो नहीं जानम 

न तुम बिन यह ज़माना अच्छा लगता है 
6 अगस्त, 2016.

Sunday, July 10, 2016

फिर चले आना [ गजल ]

1222        1222        1222       1222
गिले शिकवे सभी से अब मिटा लो फिर चले आना 
जरा तुम प्यार अपनों से जता लो फिर चले आना  

न जाने कब तलक यह रात होगी जिंदगी में अब 
दिया इक आस का तुम जो जगा लो फिर चले आना 

अभी गम के अँधेरे दूर तक हैं जिंदगी में यूँ 
गमों के ये अँधेरे तुम मिटा लो फिर चले आना 


सुखों के साथ होंगें जिंदगी में दुख बहुत यारो 
जरा मजबूत कन्धा तुम बना लो फिर चले आना 

अभी टूटे हैं सारे ख़्वाब मिलने के तुम्ही से यूँ 
वो ख्वाबे आशियाना तुम सजा लो फिर चले आना 


फिजाओं में घुला सरिता जहर फिर नफरतों का है
फिजाओं में यूँ खुशियाँ कुछ बसा लो फिर चले आना 

मिली सागर में सरिता प्यास बाकी रह गई फिर भी 
लबों/ह्रदय की तिश्नगी तुम जो बुझा लो फिर चले आना 
10 जुलाई,2016.. सरू 

Tuesday, June 21, 2016

जो हम तुम मिले थे [ गजल ]


वो गुजरा जमाना जो हम तुम मिले थे 

है बीता फ़साना जो हम तुम मिले थे|

बदलना अँगूठी को इक दूसरे से 
वो दिन था सुहाना जो हम तुम मिले थे|


बिना तेरे सूने हैं दिन और रातें
न भूले जमाना जो हम तुम मिले थे|
वो करवे की थाली वो श्रृंगार सोलह
वो गजरा लगाना जो हम तुम मिले थे|

वो बिस्तर वो तकिया वो पायल है गुमसुम
सभी देते ताना जो हम तुम मिले थे |

जिये संग सरिता ने अनमोल लम्हे 
न आये भुलाना  जो हम तुम मिले थे|
.... 21 जून,2016.

Thursday, December 18, 2014

दर्द उस सुहागिन का चूड़ियाँ समझती हैं

रुख हवाओं का केवल आंधियाँ समझती हैं  
रौशनी की कीमत को बिजलियाँ समझती हैं

दासता क्या होती है दासियाँ समझती हैं 
इंतज़ार होता क्या बेड़ियाँ समझती हैं 

रास क्यों अँधेरे आये हिचकियाँ समझती हैं ? 
रात भर जगी क्यों वो पुतलियाँ समझती हैं ?

जीत हार जीवन में मायने क्या रखती जब 
मौत जीतती आई अर्थियां समझती हैं 

राह देखती है जो साल भर ही फौजी का 
मांग उसकी सूनी को सिसकियाँ समझती हैं 

मौन आज पसरा क्यों खिलखिलाते आँगन में  
दर्द उस सुहागिन का चूड़ियाँ समझती हैं  

बस्तिओं ने झेला है टूटना औ फिर मिटना  
आग पार जाएगी बस्तियाँ समझती हैं 

फूल जो रसीला है तितलियाँ ही जानें बस  
फूल कौन तोड़ेगा डालियाँ समझती हैं 
******

Tuesday, October 28, 2014

तरही गजल

सितारों सी सजी राहें रिझाती हैं दिवाली में 
ख़ुशी की महफ़िलें जब खास आती हैं दिवाली में |

सिया औ' राम जो आए अयोध्या लौट कर तब से  
नगर गलियाँ मुंडेरें टिमटिमाती हैं दिवाली में |

दुआयें माँ हमेशा दे रही बच्चों को लगता ,जब 
फिजाएं नूर की चादर बिछाती हैं दिवाली में  |

पटाखों को नहीं कहकर, ख़ुशी से झूमते बच्चे  
सुरक्षा आदतें माएं सिखाती हैं दिवाली में |

रंगोली है सजी आँगन, दिये रोशन करें जीवन 
दियों के रूप में खुशियाँ ही आती हैं दिवाली में |

अँधेरा दूर कर मन का ,चले जो राह सच्ची हम
खुदा की रहमतें राहें दिखाती हैं दिवाली में |

*****

Tuesday, July 29, 2014

तरही गजल

नश्वर है जिंदगानी खजाना तो है नहीं 
इसको यूँ दाग यार लगाना तो है नहीं |

आई हूँ इस सराय मुसाफिर हूँ दोस्तो 
अपना भी इस जहां में ठिकाना तो है नहीं |

यूँ प्यार से तो माँग लो जान भी मगर
गुस्सा हमें तू यार दिखाना तो है नहीं |

आशिक नही जहान में सच्चा कहें जिसे 
कैसे कहें ह्रदय उसे जाना तो है नहीं |

वादा किया था उसने न छोड़ेंगे साथ हम
थामा है गैर हाथ बताना तो है नहीं |

बस बांटना है प्यार हमें कुल जहान में 
अपना भी कोई ख़ास निशाना तो है नहीं |

हर रोज हैं इमारतें बनती यहाँ वहाँ 
उजड़ा जो आशियाना बनाना तो है नहीं |

भाषण हुए हैं खास कुपोषण के नाम पे  
घर में गरीब के पका खाना तो है नहीं |

Sunday, February 23, 2014

जो छत हो आसमां सारा यहाँ ऐसा मकाँ इक हो [गजल]

दिलों में रंजिशें ना हों यहाँ ऐसा जहाँ इक हो  
जो छत हो आसमां सारा यहाँ ऐसा मकाँ इक हो |

नया हर जो सवेरा हो मिले सुख शांति हर घर में
मिटे ना वक्त के हाथों जो ऐसा आशियाँ इक हो |

बुराई ,लोभ ,भ्रष्टाचार, धोखा दूर हो कोसों 
हो केवल प्यार हर घर में बसेरा अब वहाँ इक हो |

मिले केवल सुकूं अब और हो मुस्कान होठों पर 
घुली मिश्री हो बातों में यहाँ ऐसी जुबाँ इक हो |

निशानी अब हसीं यादों की लम्हा लम्हा मुस्काये 
हों चर्चे कुल जहां अपने ही ऐसी दास्ताँ इक हो | 

नहीं कुछ चाहिए मुझको दे दो विश्वास तुम इतना 
गवाही माँगे जग सारा वहाँ तेरा बयाँ इक हो |

नहीं हो मनमुटा रखना निशानी प्यार ही केवल 
मिटे ना वक्त के हाथों जो ऐसा अब निशाँ इक हो |

*****

Monday, January 27, 2014

अँधेरे रास हैं आए वफ़ा तुझसे निभाने में

1222    1222    1222     1222
बड़ी मुश्किल से कुछ 'अपने' मिले हमको ज़माने में 
कहीं उनको न खो दूँ ख्वाहिशें अपनी जुटाने में /

बने जो नाम के अपने हैं उनसे दूरियाँ अच्छी 
मिलेगा क्या भला नजदीकियां उनसे बढ़ाने में/

उजाले छोड़े हैं तेरे लिए रहना सदा रोशन  
अँधेरे रास हैं आए वफ़ा तुझसे निभाने में /

हसीं यादों ने छोड़े हैं सफ़र में ऐसे कुछ लम्हे 
रँगें हैं हाथ अपने अब निशाँ उनके मिटाने में /

दिलों को तोड़ते हैं जो विदा कर यार को ऐसे 
जो थामे धडकनें तेरी न डर अपना बनाने में /

हुई खामोश क्यों सरिता है तू आधार जीवन का 
गँवाना अब नहीं तुम वक्त खुद को आजमाने में 

********

Wednesday, January 22, 2014

गजल


1 2 2 2   1 2 2 2 

दिलों को जो सुहाते हैं /
दिलों पे जाँ लुटाते हैं /

निगाहों से क़त्ल करके
मुझे कातिल बनाते हैं /

दिलों के हैं अजब रिश्ते 
सदा अपने निभाते हैं /

यूँ पल पल मर रही हूँ मैं 
मुझे जिन्दा बताते हैं /

सभी अपने तुम्हारे बिन 
मुझे जीना सिखाते हैं /

सुना है ऐसे में अपने 
भी दामन छोड़ जाते हैं /

...................

Tuesday, January 7, 2014

यादों का वो इक सफ़र है नाम दे गया

जाने वाला साल सब सुख चैन ले गया 
नयनों में है नीर दिल में दर्द दे गया /

क्या मनाएं साल उस बिन अब लगे न दिल 
एक झटके में सभी अरमान ले गया /

मुस्कराएँ हम क्या तेरे बिन ओ साथी अब
खुशिओं का तू सारा ही सामान ले गया /

उसकी हर आहट का होता है मुझे गुमाँ
खुद को समझायें क्या वो संसार से गया /

याद आती उसकी है अब रात रात भर 
यादों का वो इक सफ़र है नाम दे गया /

काटना है अब अकेले उस बिना सफ़र 
जिन्दगी भर का गमे पैगाम दे गया /

Sunday, January 5, 2014

कभी जीवन में अपने कुछ दुखद से पल भी आते हैं

1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2 

कभी जीवन में अपने कुछ दुखद से पल भी आते हैं
सभी अपने हमेशा के लिए तब छोड़ जाते हैं /

समय अपना बुरा आया,तमस भी साथ ले आया 
करीबी जो रहे अपने वही नजरें चुराते हैं /

किसे फुर्सत हमें देखे हमारा हाल अब जाने  
हमें रुसवाइओं में तन्हा अक्सर छोड़ जाते हैं /
   
मिले ढूंढे नहीं कोई सहारा बन सके जो तब   
मुसीबत में कहाँ अब लोग यूँ रिश्ते निभाते हैं /

भला कर तू भला होगा बुरा मत सोचना मन में
रवायत यह है दुनिया की करम ही साथ जाते हैं /
  
कहाँ वश मौत पे अपना नहीं जीवन पे वश अपना  
ये खेला मौत जीवन का तो भगवन ही रचाते हैं/ 
*****

Friday, January 3, 2014

तरही गजल

जब से उनका यहाँ आना जाना हुआ 
दिल हमारा भी उनका दिवाना हुआ /

साथ तेरे का जो छूट जाना हुआ 
तब से सबका यहाँ आना जाना हुआ /

माँग तेरी भरूं आ सितारों से मैं 
ऐसा कह जो गया फिर न आना हुआ /

माँग सूनी हुई जो सितारों भरी
माथे की बिंदी छिनना बहाना हुआ /

राहतें अब कहाँ चैन दिल को कहाँ  
जख्म अब मत कुरेदो पुराना हुआ /

याद आती रही रात भर थी मुझे 
भूल वो अब गया इक जमाना हुआ /

उसके आने की टूटी है उम्मीद अब 
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ /

लाडली ही रही बेटियाँ बाप की
लाड़ छूटे जो पति घर ठिकाना हुआ / 
 ................

Sunday, December 29, 2013

यूँ लगे मुस्कराये जमाना हुआ

जब से श्वासों का फिर से न आना हुआ  
ख़त्म जीवन का तब से तराना हुआ /

इस कदर चाहता मेरा दिल है तुझे  
हार कर तेरा ही अब खजाना हुआ / 

भूल कर बेवफ़ा हो गया अजनबी   
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ /

जो किया सामना है दुखों का अभी   
यूँ लगे मुस्कराये जमाना हुआ /

तोड़ना अब न विश्वास तुम फिर कभी 
दिल हमारा है सबका निशाना हुआ / 

बेटियाँ हो विदा मायके से गईं   
पति का घर भी न लेकिन ठिकाना हुआ /

जोड़ता यूँ है किसके लिए आदमी 
खाली ही हाथ जग से रवाना हुआ /
.        ..............सरिता

Friday, December 27, 2013

जिन्दगी पर से भरोसा ही उठा है


2 1 2 2    1 1 2 2    1 1 2 2

प्यार में हमने तो यूँ दर्द सहा है
प्यार के नाम से मन डरने लगा है /


मौत को देखा है कुछ पास से इतना
जिन्दगी पर से भरोसा ही उठा है /

लम्हा हर एक जिओ आखिरी ज्यों हो
मौत पर अपना कहाँ बस भी चला है /

है जमाने का ये दस्तूर अनोखा
अपनों ने आग हवाले यूँ किया है /

बाँट सरिता जो सको प्यार को बांटो
नफरतों से तो सदा घर ही जला है /

......सरिता  भाटिया 

Monday, December 2, 2013

तरही गजल

११२१२     ११२१२     ११२१२     ११२१२ 
जो अवाम की भी पसंद हो,कभी सोचता जो बुरा न हो 
मुझे आदमी वो बना खुदा कभी जिससे कोई खता न हो /

'मुझे दे खुदा तू वो नेमतें तेरी बन्‍दगी में रहूँ सदा' 
कहीं जानवर मेरे भीतरी कभी मुँह उठा के खड़ा न हो /

बनी दरमियाँ यही दूरियां मुझे सालती दिनों रात हैं 
मिटा दूरियां मेरे वास्ते चला पास आ यूँ खफा न हो /

मुझे छोड़ दे यहीं राह में मुझे इंतज़ार है यार का 
'इसी मोड़ पर मेरे वास्ते वो चराग ले के खड़ा न हो ' /

मेरी मखमली सी है रूह जो मुझे चुभ रही किसी शूल सी 
मुझे क्‍यूँ सज़ा ये मिली बता जो गुनाह मुझसे हुआ न हो /

बढ़ी बेटियाँ रहीं पूछती तू उदास क्यों है पिता बता 
क्या समझ सके वो है गर्दिशें जो पिता अभी बना न हो /
*****

Sunday, November 10, 2013

हुआ है आज अँधेरा बुझी बसी बस्ती

हमें न रोक सकी है करीब आने से 
ये दुनिया साजिशें रचती रही ज़माने से /

कई है जिंदगियां मिटने को चले आओ 
खुलेगी आज ये किस्मत तो तेरे आने से /

मिटा गरीब का है आशियाँ सदा के लिए 
बना है मॉल सभी बस्तियां हटाने से /

हुआ है आज अँधेरा बुझी बसी बस्ती
इक आफ़ताब के बेवक्त डूब जाने से / 

बसा दो सरिता अगर तो दुआएं मिलें  
हटा दो आज अँधेरा दिया जलाने से //

****

Thursday, November 7, 2013

लगा अब दांव पर परिवार का सम्मान है

1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 

लबों से आज गायब हो गई मुस्कान है 
अजब सी अब परेशानी लिए इन्सान है / 

कभी तो दिन भी बदलेंगे ,मिलेगा चैन तब
दुखों का अंत होगा तब यही अनुमान है /

गिले शिकवे यूँ अब हावी हुए रिश्तों पे हैं  
लगा अब दांव पर परिवार का सम्मान है /

किसे अपना कहें किसको पराया हम कहें 
यहाँ हर चेहरे की अब छुपी पहचान है /

रचे हैं साजिशें गहरी मगर अब सोचते 
जफ़ा पाकर खुदी का डोलता ईमान है  /

जमाना लाख समझाए नहीं सुधरेंगे ये 
नहीं मजहब सिखाता यूँ लुटाना आन है /

चले आओ हमारे पास ढलती शाम में 
हमें घर आज फिर से ही दिखे अनजान है /

तुम्हारे साथ ही गुजरी हमारी जिंदगी 
सनम है आज भी बसती तुम्हीं में जान है /

वफ़ा  सरिता निभाई है हमेशा साथ दे 
जतन तुम भी करो मुश्किल नहीं आसान है  //

*****


Sunday, October 20, 2013

दिलों के जख्म सीले हैं

दिले नादाँ  पिया आना 
गिले शिकवे मिटा जाना
दिलों के जख्म सीले हैं 
उन्हें मरहम लगा जाना /

सनम यह बेरुखी क्यों है ?
जरा आकर बता जाना /


सनम मुझसे खफा क्यों हो ?
वो हाले दिल सुना जाना /

नहीं तकरार करना अब 
करें इज़हार आ जाना /

अभी मजबूरियां क्या हैं ?
कहे सरिता बता जाना //

Tuesday, October 15, 2013

हम अधूरे एक दूजे बिन ओ पिया

2 1 2 2   2 1 2 2   2 2 1 2
मैं तुम्हारी छाया तुम हो मेरे पिया 
अब कहीं लागे न तुम बिन यह जिया

आसमाँ से है उँचा,सागर से गहन
ऐसा सच्चा प्यार हमने तुमको किया

चाँद तुम मेरे अगर, मैं हूँ चाँदनी
ऐसा है अपना मिलन ओ रे पिया

आइना तुम हो अगर मैं तस्वीर हूँ
अक्स तुझमें मेरा ही दिखता है पिया

तुम अगर दीया तुम्हारी 'बाती' हूँ मैं
हम अधूरे एक दूजे बिन ओ पिया

मैं समाई सिन्धु में जैसे है लहर
एक ऐसा अपना संगम है ओ पिया!!
......................................................