हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

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Sunday, May 12, 2019

माँ


माएँ हमेशा अपनी मर्जी चलाती हैं
अपने बच्चों को दुखों से बचाती हैं
रातों रात जागती हैं ..
पानी कहीं चला नही जाये
सोचते सोचते जल्दी उठ जाती हैं
दुर्गा जैसे अष्ट भुजाओं से काम निपटाती हैं
एक हाथ से पानी भरती है ,
सब्जी बनाती हैं
आटा गूँथती हैं
बच्चों को जगाती हैं
तभी तो माँ ... माँ कहलाती है
कहीं कूलर का पानी गिर नहीं जाए
कहीं सब्जी जल नही जाये
कभी सब्जी को देखने भागती हैं
कभी पानी ,कभी कपडे धोने की चिंता
मन में बुदबुदाती हुई भागती रहती हैं
बहुत मुश्किल से थोड़ा अलसाती हैं
तभी तो ... माँ कहलाती हैं 
माँ ...
जरा उठकर नाश्ता बना दो
माँ .. सुनते ही चौकन्न हो जाती हैं
बेटा भूखा न चला जाये
अपना दर्द भूलकर झट से उठ जाती हैं
कभी मुश्किल आ जाये जो
बच्चों से छुप छुप रोती हैं ...
फिर भी सदा मुस्कुराती हैं
तभी तो माँ .. माँ कहलाती हैं 
बेटी घर आई है ..
उसकी चिंता में बुदबुदाती है
ससुराल में काम करती आई है
उसको खुद खाना बना बना खिलाती है
उसको सब लाड लडाती हैं
नाती पोतों पर वारी जाती हैं
तभी तो .
माँ .. माँ कहलाती है

Friday, December 25, 2015

अजन्मा अहसास

ख़ुश होती हूँ
हाँ बहुत खुश
पाकर तुम्हे इतना करीब
महसूसती हूँ
तुम्हारा अहसास
तुम्हारा स्पर्श
तुम्हारी साँसे
तुम्हारी धड़कन
पा लेती हूँ
सारी कायनात
अब है कोई
मेरा अपना
हमेशा मेरे साथ
जिस पर न्यौछावर
सृष्टिभर का प्यार
मैं
सुनने को बेताब
तुमसे एक अनमोल शब्द
"माँ "
...............
 माँ बनने का अहसास सचमुच अतुलनीय है...
..............

Sunday, May 24, 2015

मांवां ठंडियाँ छांवां

सुनो
क्या तुम जानते हो ??
वातानुकूलित कमरों से सजे
तुम्हारे घर में
सबसे अधिक पसंद है मुझे
उसकी बालकोनी
जिसमें से झांकता खुला आसमां
उसमें स्वछन्द विचरते खग
अहसास दिलाते हैं मुझे
खुले आसमां के नीचे
माँ का एक कमरे का घर
माँ की मीठी झिड़कियों से महकता
वो खुला आँगन
...................................................
       मावां ठंडियाँ छांवां

Wednesday, March 25, 2015

माँ महागौरी ,माँ सिद्धिदात्री [दोहे]

मात महागौरी सदा ,देती है सुख शांति 
श्वेत वर्ण धारण किया ,मुख से झलके कांति |

पूजा का नौवां दिवस , माँ का रूप विशेष 
मात सिद्दिदात्री हरे ,कष्ट रोग और द्वेष |

माँ दुर्गा का रूप यह, देता बोध औ' ज्ञान 
निष्ठा से हो साधना, देती है सम्मान |
****

Saturday, March 21, 2015

शैलपुत्री माँ , ब्रह्मचारिणी माँ [दोहे]

शैलपुत्री के रूप की ,पूजा करना आज 
बन जायेंगे आपके ,सारे बिगड़े काज  |

एक हाथ में कमल है , दूजे में त्रिशूल  
कृपा दृष्टि मैया धरो ,दो चरणों की धूल |



माँ दुर्गा का दूसरा , ब्रह्मचारिणी रूप  
भव्य रूप से मात के ,ढले कष्ट की धूप|

तप संयम से ही सदा ,होती मात प्रसन्न 
कठिन व्रतों के बाद जो, ग्रहण करो तुम अन्न |



तप संयम की वृद्धि हो ,औ' बढे सदाचार 

मन विचलित करना नहीं,कहे कथा का सार |
****

Saturday, June 21, 2014

मैं माँ हूँ

कभी कभी लेटे लेटे उठकर बैठ जाती 
क्योंकि ठिठुरने लगती मैं अचानक 
तो सोचती 
वो ऐसा क्यों हो ?
वो भी तो ध्यान रख सकता है मेरा 
जैसे मैं अहसास कर लेती हूँ 
जब भी सोये सोये लगता मुझे 
वो ठिठुर रहा है 
ओढाती उसे चादर 
वो जब पढ़ते पढ़ते सो जाता 
उतारती उसका चश्मा 
रख देती कहीं सुरक्षित जगह 
समेटती उसका सामान 
बिना कोई शोर किये 
ताकि वो सो सके आराम से 
फिर लगता मुझे 
अंतर है उसकी और मेरी प्रीत में  
क्योंकि वो बेटा है 
जो सीख रहा है अपनी जिम्मेदारी 
और मैं माँ हूँ 
जिसे अपनी जिम्मेदारी का अहसास है 

Thursday, May 15, 2014

माँ [दोहावली]

माँ में पूजा अर्चना ,माँ में समझ अजान 
माँ में तेरा है खुदा, माँ में है भगवान ||

माँ में गीता है बसी ,माँ में बसा कुरान  
माँ में सारे धर्म हैं ,माँ में सब भगवान ||

माँ समझे तेरी ख़ुशी, माँ ही समझे पीर 
माँ के नैनों से बहे, केवल ममता नीर ||

बच्चे होते हैं सबल, जो माँ का हो साथ 
मिलता मनचाहा अगर, सिर पर माँ का हाथ ||


माँ मूरत भगवान की, इसका सुंदर रूप 
माँ है छाया पेड़ सी, लगने ना दे धूप ||

माँ का हँसता चेहरा, ह्रदय भरे उल्लास 
माँ की ममता से सदा, बढ़ता है विश्वास ||

मंदिर मस्जिद ढूंडता, फिरता है हर द्वार 
सुख है माँ की छाँव में, करती नैया पार ||