घर में रहना , घर में रहना , घर में ही रहना है ....
हमराही
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Thursday, June 4, 2020
घर में रहना ... गीत
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Tuesday, July 10, 2018
स्वच्छता गीत
सबसे सुंदर देश हमारा,विश्व को यह बतलाना है।
हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।
हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।
सोच बदलने देश बदलने एक मसीहा आया है
छोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया है
मातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना है
हाथ मिलाकर ...
छोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया है
मातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना है
हाथ मिलाकर ...
खुद समझो सबको समझाओ महत्ता कूड़ा दान की
प्रबंधन से खाद बनाकर ,मदद करो किसान की
अपनी धरती सोना उगले,यह हमको बतलाना है
हाथ मिलाकर ...
पॉलीथिन का दामन छोड़ो,कपड़ा ,कागज अपनाओ।
गली गली हर शहर गाँव में शौचालय अब बनवाओ
वैभव शुचिता से आता है जन जन को समझाना है
हाथ मिलाकर ...
लहर चलेगी गली गली तब स्वच्छ भारत अभियान की
घर घर में जब चर्चा होगी कचरा,कूड़ा दान की
वातावरण को शुध्द बनाओ यह संदेश पहुँचाना है
हाथ मिलाकर ...
Saturday, June 4, 2016
पर्यावरण गीत
आओ मिलकर पेड़ लगायें
धरती को हम स्वर्ग बनायें
हरियाली कर छाँव बढाकर
रंग बिरंगे पुष्प खिलाकर
इस बगिया को स्वच्छ बनायें
धरती को ...
सीता,शबनम,राम,सुनीता
अफजल,पीटर,श्याम,अनीता
शेर सिंह को साथ बुलायें
धरती को ...
यह है तेरा ,वो है मेरा
राग द्वेष ने डाला डेरा
आओ मिल मतभेद मिटायें
धरती को ...
जंगल जंगल आग लगाकर
प्रदूषन सब ओर फैलाकर
ग्लोबल वार्मिंग नहीं बढ़ायें
धरती को ...
संग चलें सब नहीं अकेले
लगे रहें दुनिया के मेले
एक एक सब पेड़ लगायें
धरती को ...
पर्यावरण को शुद्ध बनाकर
हरियाली चहुँ ओर बढ़ाकर
जीने लायक इसे बनायें
धरती को ...
5जून,2016
Thursday, March 31, 2016
भारत माता की जय बोलो
अपने मन की गिरहें खोलो
भारत माता की जय बोलो
मातृभूमि की शान बनो तुम
देखो ना हैवान बनो तुम
बंद पड़े जो ताले खोलो
भारत माता ...
वीर शिवा सुभाष की धरती
भगत औ' अशफाक की धरती
जब भी बोलो पहले तोलो
भारत माता ...
एक धरा के हम रखवाले
संग रहो सारे घरवाले
इधर उधर मत तुम अब डोलो
भारत माता ...
सुन ओबैसी सुन कन्हैया
भारत माँ तेरी भी मैया
जहर फिज़ा में अब मत घोलो
भारत माता ...
Friday, March 25, 2016
आओ खेलें होली
आओ खेलें होली ,आओ खेलें होली
फिर से खेलें होली ,वही पुरानी होली
हर घर में फिर से गूँजेगी
इंकलाब की बोली
आओ खेलें होली ,आओ...
रंग बसंती पहन के निकली
है मस्तों की टोली
आओ खेलें होली , आओ...
हरा केसरी श्वेत रंग ले
तू भी आ हमझोली
आओ खेलें होली , आओ...
दंभ,द्वेष औ अकड़ जलाकर
प्यार की भर लो झोली
आओ खेलें होली , आओ...
जात पात और वैर भाव की
उठने दो अब डोली
आओ खेलें होली , आओ...
राजगुरु, सुखदेव, भगत की
याद करो अब बोली
आओ खेलें होली ,आओ खेलें होली
फिर से खेलें होली ,वही पुरानी होली
..........सरिता यश भाटिया..........
Monday, August 24, 2015
सिलसिला यह तोड़कर ...
मुँह मुझसे मोड़ कर
आज जिस मोड़ पर
चल दिए हो छोड़कर
जायें तो कहाँ जायें
सिलसिला यह तोड़कर
देखा जो सपना
हुआ नहीं अपना
रास्ते यूँ मोड़कर
जायें तो कहाँ जायें
सिलसिला यह तोड़कर
प्यार सच्चा जानकर
तुम्हे अपना मानकर
यादों को जोड़कर
जाएँ तो कहाँ जायें
सिलसिला यह तोड़कर
किस्मत जो रूठी
ख्वाहिशें सब टूटी
माँझी गया छोड़कर
जायें तो कहाँ जायें
सिलसिला यह तोड़कर
छूटा जब सहारा
दूर था किनारा
जीवन नैया मोड़कर
जायें तो कहाँ जायें
सिलसिला यह तोड़कर
.....................
यूंहीं चलता रहे सिलसिला यह प्यार का
4अगस्त 2015, 3.30pm
Tuesday, December 23, 2014
इंसानों को यह समझा दो [गीत]
बीच राह श्मशान बना दो
इंसानों को यह समझा दो
जीवन नश्वर है यह जानें
मृत्यु सत्य है उसको मानें
नफरत छोड़ प्यार सिखला दो
रूप बड़ा ही सुन्दर पाया
काया ने कब साथ निभाया
साँच बुढ़ापे का दिखला दो
यह जग एक मुसाफिरखाना
इसका राज नहीं जो जाना
राज यही उसको बतला दो
रिश्ते सारे अजब अनूठे
पाश मोह ममता के झूठे
प्रीत ईश के संग लगा दो
Friday, October 24, 2014
आओ मिलकर दीप जलायें
आओ मिलकर दीप जलायें
अंधकार को दूर भगायें

जगमग जगमग हर घर करना
अन्धकार है सबका हरना
अम्बर से धरती पर तारे
साथ चाँद को नीचे लायें |
अंतर्मन का तमस हरेंगे
कलुषित मन में प्रेम भरेंगे
द्वेष,बुराई और वासना
मिलकर सारे दूर हटायें |
उत्सव है यह दीवाली का
सुख समृद्धि और खुशहाली का
भेदभाव आपस के भूलें
मन में शांति दीप जलायें |
दीपों की पंक्तियाँ जगाई
धरती अपनी है चमकाई
सद्ज्ञान के दीप जलाकर
अंतर्मन का तिमिर मिटायें |

आपस में सब भाई भाई
खुशियाँ बाँटें और मिठाई
दीवाली के उजियारे से
हर कोना रोशन कर आयें |
लाया समय ख़ुशी की घड़ियाँ
मन में फूटी हैं फुलझड़ियाँ
दीन दुखी को गले लगाकर
उनसे पा लो खूब दुआयें ||
Monday, May 12, 2014
आओ मिलजुल देश सँवारें
आओ मिलजुल देश सँवारें
हर पल हर दिन इसे निखारें
इस बगिया के हम सब फूल
सुनो नहीं तुम जाना भूल
प्रेम से मिलकर समय गुजारें
भेदभाव ना तुम अब जानो
सबको भाई अपना मानो
एक माली सा उन्हें निहारें
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में सब भाई भाई
अत्याचारी को ललकारें
नेता बन गए हुए महान
सो गए अब तो लम्बी तान
ऐसे नेता को दुत्कारें
राम कृष्ण की करो पहचान
यह दोनों हैं हिन्द की शान
रावण कंस सभी को मारें
प्रेम की बहे अविरल धारा
सौंप देश को जीवन सारा
मन को जीत अहम को हारें
Tuesday, February 18, 2014
थोड़ा हँस लो थोड़ा गा लो [गीत]
आओ कुछ तो समय निकालो
थोड़ा हंस लो थोड़ा गा लो
जीवन की आपाधापी में
अपने पीछे छूट न जाएँ
नन्हे सपने टूट न जाएँ
जरा नया उत्साह जगा लो
थोड़ा हंस लो..........
अपने हम से रूठ गए जो
जीवन पथ पर छूट गए जो
उनकी यादों से अब निकलो
रूठ गए जो उन्हें मना लो
थोड़ा हंस लो..........
देख समय ने करवट खाई
फिर क्यों है मायूसी छाई
दे दो गम को आज विदाई
बुरे समय को हँस कर टालो
थोड़ा हंस लो..........
दिल सच्चा हो ना हो झूठा
कोई ना हो हमसे रूठा
रिश्ता उपजे एक अनूठा
दिल से अपनों को अपना लो
थोड़ा हंस लो..........
बात करेंगे बात बनेगी
सारी दुनिया तुम्हें सुनेगी
नैया इक दिन पार लगेगी
खुशियाँ बांटो खुशियाँ पा लो
थोड़ा हंस लो..........
अब समय ने ली अंगड़ाई
क्यों है अब भी चुप्पी छाई
सबने किस्मत स्वयं बनाई
अपनी किस्मत स्वयं बनालो
थोड़ा हंस लो..........
जब कारवाँ छूट जाएगा
स्वयं को अकेला पाएगा
प्रभु नाम ही संग जाएगा
अपनी यात्रा सफल बनालो
थोड़ा हंस लो..........
Thursday, August 15, 2013
'' भारत की बात सुनाती हूँ ''
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
द्वापर में कृष्ण जी आए
महाभारत से पाप मिटाए
फिर वोही बोध कराती हूँ |
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ||
खड़ा हिमालय पहरेदार ,
नदिओं की बहती कल कल धार
मैं मंगल गीत गाती हूँ |
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
ऋषि मुनिओं ने धरती सींची
हमने हैं रेखाएं खींची
मैं प्रेम भाषा दोहराती हूँ |
भाता की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
त्रेता युग में राम जी आए
रामराज्य का पाठ पढाए
मैं वोही कल्पना गाती हूँ|
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
बुद्द महावीर दयानंद की धरती
सारी दुनिया अनुसरण है करती
मैं नित नित शीश झुकाती हूँ|
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
भगत,उधम,सुभाष की जननी
प्रताप शिवा आजाद की जननी
मैं वन्दे मातरम गाती हूँ |
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
तिरंगा है मेरी आन बान
इससे है भारत की शान
विश्व में ऊँचा लहराती हूँ|
भारत की बात सुनाती हूँ
मैं गौरव गाथा गाती हूँ ||
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