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Monday, December 22, 2014
कागज़ कलम दवात [कुण्डलिनी]
बहते जब जज्बात हैं, रुकते ना तब हाथ
कागज़ कलम दवात का, मिल जाता जो साथ ||
मिल जाता जो साथ, पीर है कागज़ हरता
बहे कलम से पीर, ह्रदय सुकून से भरता ||
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Tuesday, October 28, 2014
धूम्रपान [कुण्डलिनी]
धूम्रपान के रोग से तभी बचोगे यार
वैधानिक चेतावनी जो ना हो बेकार
जो ना हो बेकार अमल में इसको लाओ
यह जीवन अनमोल ख़ुशी से इसे बिताओ
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Tuesday, September 9, 2014
रामराज्य [कुण्डलिनी]
राम राज्य की कल्पना होने को साकार
अच्छे दिन हैं आ गए अब मोदी सरकार
अब मोदी सरकार ,शुभ आगाज है लाई
होगा युग बदलाव फिजा में खुशबू छाई
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Monday, September 8, 2014
नदिया के तीर [कुण्डलिनी]
इक नदिया के तीर दो, जैसे चलते साथ
मिलन असंभव है मगर, रहे हाथ में हाथ |
रहे हाथ में हाथ ,दुःख सुख ऐसे बाँटें
होता सच्चा प्यार ,फूल बनें तभी काँटें |
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Tuesday, September 2, 2014
मिट्टी [कुण्डलिनी]
मिट्टी को कुम्हार ने ,दिए कई आकार
गुलदान,घड़ा, घोलकें ,डिब्बे हुक्का तैयार
डिब्बे हुक्का तैयार ,खड़ा है हाथी घोड़ा
मिट्टी पाया रूप , लगा उसे जो हथौड़ा
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Wednesday, August 27, 2014
धड़कन [कुण्डलिनी]
धड़कन से चालू हुआ ,धड़कन पर सब बंद
मोल समय का जान लो ,यह इसकी पाबंद
यह इसकी पाबंद ,आस जीवन की बनती
नैया लगती पार ,अगर है धड़कन चलती
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Wednesday, June 25, 2014
श्रमिक [कुण्डलिनी]
कैसा जीवन श्रमिक का, दर्द भूख औ प्यास
पेट भरेगा आज तो ,करे यही नित आस
करे यही नित आस,काम करे मिले पैसा
भूखी फिर सन्तान,न्याय है उसका कैसा ||
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Wednesday, June 11, 2014
मजदूर [कुण्डलिनी]
कलम बना है फावड़ा स्याही तन की ओस
लेखन करना रोज है तनिक नहीं अफ़सोस
तनिक नहीं अफ़सोस नहीं जो रोटी खाई
पालन को सन्तान जोड़नी पाई पाई ||
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Saturday, June 7, 2014
माँ [कुण्डलिनी]
माँ में तीरथ हैं सभी माँ में हैं सब धाम
जीवन तुम संवार लो करो नेक कुछ काम
करो नेक कुछ काम दान यह सच्चा प्यारे
माँ बिन सूना गेह सब हैं सूने नज़ारे ||
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Sunday, May 25, 2014
इंसान [कुण्डलिनी ]
मंदिर मस्जिद सोचते ,वो होते इंसान
जात परिंदों की भली, देखें ना भगवान ||
देखें ना भगवान ,कहीं भी करें बसेरा
यह फितरत इंसान, सोच के डालें डेरा ||
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