हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Showing posts with label बरखा. Show all posts
Showing posts with label बरखा. Show all posts

Tuesday, July 2, 2013

दोहे [बरखा]



जल बिन सब बेजान हैं ,धरती कहे पुकार
बरखा देखो आ गई ,लेकर सुखद फुहार

घाव धरा के भर गए , ग्रीष्म हो गया लुप्त
जल फैला चहुँ ओर है ,धरा हो गई तृप्त

बरखा ले कर आ गई , राहत और सुकून

दिल्ली भी अब बन गई ,देख देहरादून