हमराही

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Monday, January 18, 2016

रूह के रिश्ते

रूह के रिश्ते 
होते हैं अजीब 
न समझो तो हैं दूर,
जो समझो तो हैं बहुत करीब

रूह के रिश्ते 
जो बिन देखे बन जाते हैं 
अगर जो न मिल पायें 
तो जीवन भर तड़पाते हैं 

रूह के रिश्तों  को तोड़कर 
हो पाता नहीं कोई गैर 
दूर चाहे जितना रहें 
मांगे सदा ही खैर 

रूह के रिश्ते 
जो बिन बाँधे बंध जाते हैं 
बनता है अटूट बंधन 
फिर तोड़े कभी ना जाते हैं 
...................

Wednesday, September 9, 2015

रूह ए परिंदा उड़ जायेगा एक दिन..

नेकियों के लिबास से ,ढक लो बदन तुम अपना 
भगवान के घर कपड़ों की दुकान नहीं है 
रूह बदलती है यहाँ रोज घरौंदा 
उसका कोई अपना मकान नहीं है |


मिट्टी से बने और मिट्टी में ही जा मिले
मिट्टी से अलग अपनी पहचान नहीं है 
रूह ए परिंदा उड़ जायेगा एक दिन
इस बात से अब कोई भी अनजान नहीं है |
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