हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Friday, February 8, 2013

''..प्यार को प्यार ही रहने दो ..''


सभी दोस्तों का शुक्रिया, ऋतुराज बसंत की रचना 
''यह तो मौसम का जादू है मितवा''पसंद करने के लिए! 
यह तो 'वेलिंटाइन डे' के बारे में बताने की कोशिश की ,जो अपने
ऋतुराज बसंत से कुछ अलग नहीं है ,यह तो एक वर्ष पहले पश्चिम 
से आया है हमारीतो सदियों से यह परंपरा रही है ,पुष्पों के खिलने 
पर हर मन उत्साहित होता है,श्रृंगार रस के कवियों ने सबसे अधिक 
बसंत ऋतु पर ही कविताएँ लिखी हैं,और अपने संगीत में इन पुष्पों 
का बहुत महत्व है ,वैसे तो मेरा मानना है कि प्यार के इज़हार के 
लिए कोई मौसम की ,दिन की बंदिश नहीं है,यह तो एक सुखद अनुभूति 
है जिसका कोई समय तय नहीं है,इसी को प्रस्तुत करती मेरी छोटी सी
भेंट दोस्तों के नाम........  



प्यार को प्यार ही रहने दो .............

मेरा प्यार मोहताज नहीं उन तिथियों का
जो 'रोज़ डे' को गुलाब देने से
'टेडी डे' पर टेडी देने से याद आए
जिसके लिए एक ख़ास दिन 
'वेलिंटाइन डे' मुकर्र किया जाए,
यह तो है एक निच्छल,अविरल,अहसास
जो बाँधे है मुझे निरंतर 
जीवन की डोर से
जो दे जाता है एक विश्वसनीय आस

यह तो है इक सुखद अनुभूति
जिसका नहीं है जवाब
कब? कहाँ ?कैसे हो जाए?
नहीं कोई इसका हिसाब

रोज़ डे पर रोज़,चाकलेट डे पर चाकलेट
टेडी डे पर टेडी नहीं है मुझे स्वीकार
कोई अपना जो करे मेरी चिन्ता
यही है मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार

या यूँ कहिए
ना दो चाकलेट,टेडी या रोज़
करती हूँ मैं इसे अपोज़
कोई मेरे लिए करे क़ेयर
जो करे सब मुझसे शेयर
वोह है मेरे सबसे नियर
वोही है मुझे सबसे डियर
Post A Comment Using..

14 comments :

  1. प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो ....

    RECENT POST: रिश्वत लिए वगैर...

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभार जी, आशीर्वाद बनाए रखें

      Delete
  2. सही कहा आपने सच्चा प्यार किसी डे का मोहताज नहीं ! सुन्दर भाव !

    ReplyDelete
  3. बोगस वोटिंग हो रही, वेटिंग इक सप्ताह ।

    चौदह जन तैयार मन, आह वाह हो स्वाह ।



    आह वाह हो स्वाह, हवा बहती बासंती ।

    आज बढ़ी उम्मीद, छाप दी एक तुरंती ।



    लेकिन रविकर खिन्न, करे तन मन से फोकस ।

    फल ना पाए भिन्न, होय बैलट ही बोगस ।

    ReplyDelete
  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (9-2-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया वंदना जी

      Delete
  5. बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद

    ReplyDelete
    Replies
    1. aap to shabdon ke jadugar hain, shukriya
      aapko hamari aahat dehleej par mil gai hogi

      Delete
  6. कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    शब्दों की मुस्कुराहट पर ...आकर्षण

    ReplyDelete