हमराही

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Monday, May 12, 2014

आओ मिलजुल देश सँवारें


आओ मिलजुल देश सँवारें 
हर पल हर दिन इसे निखारें  

इस बगिया के हम सब फूल 
सुनो नहीं तुम जाना भूल 
प्रेम से मिलकर समय गुजारें   

भेदभाव ना तुम अब जानो 
सबको भाई अपना मानो 
एक माली सा उन्हें निहारें 

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई 
आपस में सब भाई भाई 
अत्याचारी को ललकारें 

नेता बन गए हुए महान 
सो गए अब तो लम्बी तान 
ऐसे नेता को दुत्कारें  

राम कृष्ण की करो पहचान 
यह दोनों हैं हिन्द की शान 
रावण कंस सभी को मारें 

प्रेम की बहे अविरल धारा 
सौंप देश को जीवन सारा 
मन को जीत अहम को हारें 


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