घर में रहना , घर में रहना , घर में ही रहना है ....
हमराही
Thursday, June 4, 2020
घर में रहना ... गीत
लेबल:
अभिवादन,
गीत,
घर में रहना,
राष्ट्रनायक,
लॉकडाउन,
हाथ,
हुनर
Thursday, April 16, 2020
चौपाई, कोरोना
अजब फैल गई महामारी
सारी दुनिया उससे हारी
कोरोना का रावण आया
खांसी,नजला, कंठ सुखाया।
सांसों की तकलीफें लाया
लॉक डाउन में हमें फंसाया।
रामराज्य को वापिस लाओ
कॉविड से पीछा छुड़वाओ।
वैद्य, हकीम नब्ज को जानो
भारत की दुविधा पहचानो।
समय यही हनुमान बुलाओ
जड़ ,कंद फिर से मंगवाओ।
मूर्छा हर , हर लक्ष्मण जागे
कोरोना तब डरकर भागे
डॉक्टर ,नर्स और सिपाही
मानवता की बने गवाही
उनका कर्जा आज चुकाओ
धन्यवाद कह फर्ज निभाओ।
राष्ट्रधर्म है मनुज निभाओ
हर भूखे को रोज खिलाओ।।
..... मौलिक एवं स्वरचित...
..सरिता यश भाटिया ...
सारी दुनिया उससे हारी
कोरोना का रावण आया
खांसी,नजला, कंठ सुखाया।
सांसों की तकलीफें लाया
लॉक डाउन में हमें फंसाया।
रामराज्य को वापिस लाओ
कॉविड से पीछा छुड़वाओ।
वैद्य, हकीम नब्ज को जानो
भारत की दुविधा पहचानो।
समय यही हनुमान बुलाओ
जड़ ,कंद फिर से मंगवाओ।
मूर्छा हर , हर लक्ष्मण जागे
कोरोना तब डरकर भागे
डॉक्टर ,नर्स और सिपाही
मानवता की बने गवाही
उनका कर्जा आज चुकाओ
धन्यवाद कह फर्ज निभाओ।
राष्ट्रधर्म है मनुज निभाओ
हर भूखे को रोज खिलाओ।।
..... मौलिक एवं स्वरचित...
..सरिता यश भाटिया ...
Wednesday, April 15, 2020
राष्ट्रनायक लॉकडाउन संदेश
राष्ट्रनायक का यही संदेशा, जन जन से कहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
रक्षक डॉक्टर, नर्स ,सिपाही
मानवता की बने गवाही
धन्यवाद के पात्र यही हैं, हाथ जोड़ कहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
लॉक डाउन का समय है आया
अपनों का सँग हमने पाया
दादा, दादी, मात, पिता ,सुत,सुता, भ्रात, बहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
योग करो सुन्दर तन पाओ
प्राणायाम से रोग भगाओ
जिम ,कसरत सब करते रहना, सेहत ही गहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
हाथ किसी से नहीं मिलाओ
सिर्फ नमस्ते करते जाओ
अभिवादन का नया सलीका,दूरी को सहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
चलते रहना डगर जिंदगी
कठिन बहुत है अभी बंदगी
यहां रुके हो ,रुको साथियों,यही तुम्हे कहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
कोरोना का तमस मिटाओ
आओ सब मिल दिया जलाओ
नमन करो उन्हे, देवदूत का, चोला जिन पहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
कठिन घड़ी है इसे संभालो
अपना संयम आज दिखालो
हुनर निखारो , पढ़ो ,लिखो सब ,यही आज कहना है।
घर में रहना ,घर में रहना ,घर में ही रहना है।
नाक, नयन ,मुख 'गर हो छूना
बार बार हाथों को धोना,
जीवन नैया फिर चल देगी इसको तो बहना है
घर में रहना, घर में रहना ,घर में ही रहना
...सरिता यश भाटिया....
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
रक्षक डॉक्टर, नर्स ,सिपाही
मानवता की बने गवाही
धन्यवाद के पात्र यही हैं, हाथ जोड़ कहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
लॉक डाउन का समय है आया
अपनों का सँग हमने पाया
दादा, दादी, मात, पिता ,सुत,सुता, भ्रात, बहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
योग करो सुन्दर तन पाओ
प्राणायाम से रोग भगाओ
जिम ,कसरत सब करते रहना, सेहत ही गहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
हाथ किसी से नहीं मिलाओ
सिर्फ नमस्ते करते जाओ
अभिवादन का नया सलीका,दूरी को सहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
चलते रहना डगर जिंदगी
कठिन बहुत है अभी बंदगी
यहां रुके हो ,रुको साथियों,यही तुम्हे कहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
कोरोना का तमस मिटाओ
आओ सब मिल दिया जलाओ
नमन करो उन्हे, देवदूत का, चोला जिन पहना है
घर में रहना ,घर में रहना, घर में ही रहना है
कठिन घड़ी है इसे संभालो
अपना संयम आज दिखालो
हुनर निखारो , पढ़ो ,लिखो सब ,यही आज कहना है।
घर में रहना ,घर में रहना ,घर में ही रहना है।
नाक, नयन ,मुख 'गर हो छूना
बार बार हाथों को धोना,
जीवन नैया फिर चल देगी इसको तो बहना है
घर में रहना, घर में रहना ,घर में ही रहना
...सरिता यश भाटिया....
लॉकडाउन
स्वच्छ हवा ने डाला डेरा
ट्रैफिक का तोड़ा है घेरा
योग करो और रहो निरोग
प्राणायाम से भागें रोग
लॉक डाउन का समय है आया
नीला अम्बर वापस लाया
चहकें पक्षी ,सुनो आवाज
सतयुग का फिर हुआ आगाज
कुदरत के है अद्भुत रंग
बैठे हैं घर सबके संग
मन करता है यहीं बस जाएं
लॉक डाउन का समय बढ़ाएं
ट्रैफिक का तोड़ा है घेरा
योग करो और रहो निरोग
प्राणायाम से भागें रोग
लॉक डाउन का समय है आया
नीला अम्बर वापस लाया
चहकें पक्षी ,सुनो आवाज
सतयुग का फिर हुआ आगाज
कुदरत के है अद्भुत रंग
बैठे हैं घर सबके संग
मन करता है यहीं बस जाएं
लॉक डाउन का समय बढ़ाएं
Tuesday, April 14, 2020
चौपाई कारोना
चौपाई
किया करोना ने जग सूना
नाक, नयन ,मुख को मत छूना
खांसी छींक अगर जो आयी।
मुख ढकना है सरल उपायी
बार बार सब कर तुम धोना
तब मानस क्या करे करोना
नहीं हाथ प्रिय अभी मिलाना
अगर करोना दूर भगाना
गले लगाओ हुआ पुराना
अभिवादन का नया जमाना
हाथ किसी से नहीं मिलाओ
सिर्फ नमस्ते करते जाओ
मेड इन चाइना तभी हराओ
सभी नमस्ते जब अपनाओ
#कोरोना #चौपाई
किया करोना ने जग सूना
नाक, नयन ,मुख को मत छूना
खांसी छींक अगर जो आयी।
मुख ढकना है सरल उपायी
बार बार सब कर तुम धोना
तब मानस क्या करे करोना
नहीं हाथ प्रिय अभी मिलाना
अगर करोना दूर भगाना
गले लगाओ हुआ पुराना
अभिवादन का नया जमाना
हाथ किसी से नहीं मिलाओ
सिर्फ नमस्ते करते जाओ
मेड इन चाइना तभी हराओ
सभी नमस्ते जब अपनाओ
#कोरोना #चौपाई
को रो ना सुझाव दोहे
मत छुओ मुख ,नाक, नयन, बार बार धो हाथ।
अभिवादन कर दूर से, हाथ जोड़कर साथ।।
मुख ढक खांसो, छींक लो, करो मनुज उपचार।
डॉक्टर को जाकर मिलो ,चढ़ता अगर बुखार।।
अब तुम मत लगना गले, नहीं मिलाना हाथ।
करो नमस्ते प्यार से, सब जन देकर साथ।।
Sunday, May 12, 2019
माँ
माएँ हमेशा अपनी मर्जी चलाती हैं
अपने बच्चों को दुखों से बचाती हैं
रातों रात जागती हैं ..
पानी कहीं चला नही जाये
सोचते सोचते जल्दी उठ जाती हैं
दुर्गा जैसे अष्ट भुजाओं से काम निपटाती हैं
एक हाथ से पानी भरती है ,
सब्जी बनाती हैं
आटा गूँथती हैं
बच्चों को जगाती हैं
तभी तो माँ ... माँ कहलाती है
कहीं कूलर का पानी गिर नहीं जाए
कहीं सब्जी जल नही जाये
कभी सब्जी को देखने भागती हैं
कभी पानी ,कभी कपडे धोने की चिंता
मन में बुदबुदाती हुई भागती रहती हैं
बहुत मुश्किल से थोड़ा अलसाती हैं
तभी तो ... माँ कहलाती हैं
माँ ...
जरा उठकर नाश्ता बना दो
माँ .. सुनते ही चौकन्न हो जाती हैं
बेटा भूखा न चला जाये
अपना दर्द भूलकर झट से उठ जाती हैं
कभी मुश्किल आ जाये जो
बच्चों से छुप छुप रोती हैं ...
फिर भी सदा मुस्कुराती हैं
तभी तो माँ .. माँ कहलाती हैं
जरा उठकर नाश्ता बना दो
माँ .. सुनते ही चौकन्न हो जाती हैं
बेटा भूखा न चला जाये
अपना दर्द भूलकर झट से उठ जाती हैं
कभी मुश्किल आ जाये जो
बच्चों से छुप छुप रोती हैं ...
फिर भी सदा मुस्कुराती हैं
तभी तो माँ .. माँ कहलाती हैं
बेटी घर आई है ..
उसकी चिंता में बुदबुदाती है
ससुराल में काम करती आई है
उसको खुद खाना बना बना खिलाती है
उसको सब लाड लडाती हैं
नाती पोतों पर वारी जाती हैं
तभी तो .
उसकी चिंता में बुदबुदाती है
ससुराल में काम करती आई है
उसको खुद खाना बना बना खिलाती है
उसको सब लाड लडाती हैं
नाती पोतों पर वारी जाती हैं
तभी तो .
माँ .. माँ कहलाती है
Friday, October 19, 2018
Tuesday, July 10, 2018
स्वच्छता गीत
सबसे सुंदर देश हमारा,विश्व को यह बतलाना है।
हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।
हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।
सोच बदलने देश बदलने एक मसीहा आया है
छोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया है
मातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना है
हाथ मिलाकर ...
छोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया है
मातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना है
हाथ मिलाकर ...
खुद समझो सबको समझाओ महत्ता कूड़ा दान की
प्रबंधन से खाद बनाकर ,मदद करो किसान की
अपनी धरती सोना उगले,यह हमको बतलाना है
हाथ मिलाकर ...
पॉलीथिन का दामन छोड़ो,कपड़ा ,कागज अपनाओ।
गली गली हर शहर गाँव में शौचालय अब बनवाओ
वैभव शुचिता से आता है जन जन को समझाना है
हाथ मिलाकर ...
लहर चलेगी गली गली तब स्वच्छ भारत अभियान की
घर घर में जब चर्चा होगी कचरा,कूड़ा दान की
वातावरण को शुध्द बनाओ यह संदेश पहुँचाना है
हाथ मिलाकर ...
Thursday, October 5, 2017
शरद पूर्णिमा ( कुंडलिया )
लेबल:
अश्विन पूर्णिमा,
उत्सव,
किरणें,
कुण्डलिया,
चाँद,
छंद,
शरद पूर्णिमा,
शरदोत्सव
Saturday, September 30, 2017
विजयादशमी (कुंडलिया)
आया उत्सव विजय का,विजयादशमी नाम।
आज दशानन मार कर ,बोलो जय श्री राम।।
बोलो जय श्री राम , हार कर चली बुराई
महिषासुर को मार,आज जीती अच्छाई
काम,क्रोध,मद, लोभ,अहम को अगर जलाया।
सरिता उस दिन मान,विजय उत्सव है आया।।
असली रावण मार कर ,मनुज स्वयं को जीत
वचन निभाओ प्राण दे, लाओ रघुकुल रीत
लाओ रघुकुल रीत, विजय का पर्व मनाओ
करो विसर्जन पाप ,पुण्य पताका चढ़ाओ
छोड़ो भ्रष्टाचार ,उतार मुखौटा नकली
सरिता पूजो शक्ति ,दशहरा तब ही असली ।।
Thursday, September 28, 2017
महागौरी माँ ( कुंडलिया )
चम चम अष्टम रूप है, कर लो माँ का ध्यान।
उज्ज्वल मंगलदायिनी ,देती माँ वरदान
देती माँ वरदान ,महागौरी रूप धवल
शिवा,शाम्भवी नाम,गौर वर्ण पूरण नवल
माँ के हाथ त्रिशूल,बजे है डमरू डम डम
सरिता छाया ओज,चेहरा चमके चम चम ।।
कालरात्रि माँ ( कुंडलिया )
काली माँ है सातवाँ, दुर्गा जी का रूप।
शुभंकरी फलदायिनी ,इसका रूप अनूप
इसका रूप अनूप, विकट कालरात्रि माई
धनुष ,चक्र,गदा,बाण,केश फैलाकर आई
कृष्णा ,काली और , नाम त्रिनेत्री कराली
गर्दव हुई सवार ,पधारी निर्भय काली।।
शुभंकरी फलदायिनी ,इसका रूप अनूप
इसका रूप अनूप, विकट कालरात्रि माई
धनुष ,चक्र,गदा,बाण,केश फैलाकर आई
कृष्णा ,काली और , नाम त्रिनेत्री कराली
गर्दव हुई सवार ,पधारी निर्भय काली।।
लेबल:
उत्सव कुण्डलिया,
कालरात्रि,
काली,
छंद,
नवरात्रि,
शुभंकरी,
सप्तम नवरात्रि
कात्यायनी माँ ( कुंडलिया )
ध्याते षष्ठम रूप को ,देती है माँ शक्ति।
कल्याणी कात्यायनी,कर लो माँ की भक्ति।।
कर लो माँ की भक्ति,मनोवांछित है मिलता
एक हाथ तलवार,कमल दूजे में खिलता
मिट जाते संताप ,शरण माँ की जो आते
माँ का स्वर्ण समान, रूप जो सरिता ध्याते।।
कल्याणी कात्यायनी,कर लो माँ की भक्ति।।
कर लो माँ की भक्ति,मनोवांछित है मिलता
एक हाथ तलवार,कमल दूजे में खिलता
मिट जाते संताप ,शरण माँ की जो आते
माँ का स्वर्ण समान, रूप जो सरिता ध्याते।।
स्कन्दमाता माँ ( कुंडलिया )
कहें स्कन्दमाता जिसे,पंचम रूप/दिवस अनूप
कर लो इसकी अर्चना, दिव्य अलौकिक रूप
दिव्य अलौकिक रूप, सदा माँ है सुखदायी
गोद लिए माँ स्कन्द ,चतुर्भुज वह फलदायी
मिले मोक्ष का द्वार ,मनुज मनवांछित पाता
सरिता गौरी रूप,भक्त कहें स्कन्दमाता।।
कर लो इसकी अर्चना, दिव्य अलौकिक रूप
दिव्य अलौकिक रूप, सदा माँ है सुखदायी
गोद लिए माँ स्कन्द ,चतुर्भुज वह फलदायी
मिले मोक्ष का द्वार ,मनुज मनवांछित पाता
सरिता गौरी रूप,भक्त कहें स्कन्दमाता।।
Monday, September 25, 2017
कूष्मांडा देवी [ कुंडलिया ]
साधक करते साधना ,होते सफल प्रयास।
कूष्मांडा देवी करे, पूर्ण मनुज हर आस।।
पूर्ण मनुज हर आस, करे अष्टभुजा मैया
होकर सिंह सवार, पार करती माँ नैया
सरिता माँ के भक्त,नहीं विपदा से डरते
रोग ,कष्ट से मुक्त,साधना साधक करते ||
लेबल:
उत्सव,
कुण्डलिया,
कुष्मांडा,
कुष्मांडा माँ,
चतुर्थ नवरात्रि,
छंद,
नवरात्रि
चंद्रघंटा माँ ( कुंडलिया )
लेबल:
उत्सव,
कुण्डलिया,
चंद्रघंटा,
चंद्रघंटा माँ,
छंद,
तीसरा नवरात्रि,
नवरात्रि
Sunday, September 24, 2017
ब्रह्मचारिणी देवी ( कुंडलिया )
लेबल:
उत्सव,
कुण्डलिया,
छंद,
दूसरा नवरात्रि,
नवरात्रि,
ब्रह्मचारिणी
शैलपुत्री देवी ( कुंडलिया)
लेबल:
कुण्डलिया,
छंद,
नवरात्रि,
प्रथम नवरात्रि,
शैलपुत्री
नवरात्रि कुंडलिया
कर लो माँ की अर्चना, अश्विन का है मास।
आये फिर नवरात्र हैं,शुरू हुए उपवास।।
शुरू हुए उपवास, द्वार मैया के जाओ
करे मुरादें पूर्ण, झोलियाँ भर के लाओ
लो चरणों की धूल, ध्यान मैया का धर लो
रखकर शुभ उपवास, अर्चना सरिता कर लो ।।
. . . 22सितंबर,2017
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