हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Saturday, March 2, 2013

'नयन,ह्रदय,प्रीत'


प्रथम प्रयास दोहा लिखने का गुरु जी एवं अरुण के अथक प्रयास के साथ 
कृपया गलती निसंकोच बताएं ...... 

नयन मिलें जब आपसे ,पुष्प ह्रदय खिल जाय
 मन का पंछी उड़ चला ,कछु भी नही सुहाय

मन पंछी जो उड़ गया  ,फिर काहे पछताय
ह्रदय  प्रेम  क्यों गोरिया ,नयनों से छलकाय  

नयन मिला कर कृष्ण से, करले सच्ची प्रीत।
इस झूठे संसार में, नहीं कृष्ण सा मीत ।।


Tuesday, February 26, 2013

''... इंतज़ार ...''





कैसे न करें हम उनका इंतजार ,
सुना है वो हमारा शिद्दत से इंतज़ार करते हैं!

कहते हैं सब्र का फल मीठा होता है,
इसलिए उनसे मिलने का सब्र हम हर बार करते हैं!

वो कहते हैं सपनों में आना ज़रूर,
हम भी वादा उनसे मुलाकात का बार बार करते हैं! 

वो कहते हैं हमारी मुस्कान से हैं धड़कनें उनकी,
हम  भी मुस्करा कर उनके दिल को गुलज़ार करते हैं!! 

Friday, February 22, 2013

'...सूचना...'


शुभम दोस्तों ...




मेरी रचना 'आम आदमी कि व्यथा ' शोभना ब्लॉग 



रत्न पुरस्कार के लिए चयनित हुई है आप इसे like 



कर अपने शुभ विचार अवश्य रखें ,धन्यवाद ! 

 http://www.saadarblogaste.in/2013/02/8.html

Thursday, February 21, 2013

''..महाकुंभ..''


महाकुंभ का देखो कैसा मेला
इलाहाबाद में दुनिया का रेला



कुंभ में संस्कृति की झलक देखो
थम जाएँ साँसें जो अपल्क देखो

हो कोई पूर्ववासी या पश्चिम से आया
संगम में जाकर सबने डुबकी लगाया

बढ़ी अद्भुत है यह अखाड़ों की दुनिया
अटल है यह अपने संस्कारों की दुनिया






कोई वस्त्र त्यागे,कोई नाख़ून बढ़ाए
कैसे कैसे बैठे हैं ये रूप अपनाए

शिव की जटाओं से गंगा जैसे बहती
इनकी जटाएँ क्या क्या कहानी कहती




इतने बढ़ जाएँ पाप जब धरती बोझिल हो जाए
पूरी धरती एक दिन कहीं ना गंगा में समा जाए


''महाकुंभ'' का मेला हर साल आना चाहिए
ऐसे ही सही धरती का बोझ तो हटाना चाहिए


Monday, February 18, 2013

!!..'बचपन सुरक्षा' एवं 'नारी उत्थान' ..!!


कलेजे के टुकड़े को 
सड़क पर छोड़,
सफेद फटी साड़ी में, 
अपनी अस्मिता समेटे
एक पत्थर तोड़ती माँ!




पेट की अग्नि शांत करने को,
चिथड़ों में लिपटे, 
कूड़ा बीनते, 
दो छोटे बच्चे.





कह गये ...
सरकार द्वारा चलाए अभियान की,
अनकही 
'बचपन सुरक्षा',
'नारी उत्थान' 
की कहानी,
अपनी इस तस्वीर की ज़ुबानी
...........................................

Thursday, February 14, 2013

''बसंत है आया''


                                          ए माँ शारदे,हम सबको ऐसा वर दो,
                                          खुशियों से सबका घर तुम भर दो!
       



                                             श्वेत वरण में कमल पर विराजे,
                                             हमारा भी मन कमल सा खिला दे!

                                             धरती ने ली है पीली चादर ओढ़,
                                             मोर की सवारी में लगे तू बेजोड़!

                                           सतरंगी पतंगो का गगन में विस्तार,
                                            बच्चों के मन में लाए उमंगें अपार!

                                            वीणा से प्यार की 'सरिता 'यूँ बहा दो,
                                            उज्ज्वल भविष्य कर जीवन महका दो!

                                            बुद्दि से प्रखर कर अहम को मिटा दो,
                                            विद्द्या का दान देकर बुराइयाँ हटा दो!
   
                                            पीले वस्त्र पहन,सब पीला प्रसाद खाएँ,
                                            सरस्वती की पूजा कर,खुशियाँ मनाएँ!
     





                                       'बसंत है आया' तुम भी गुलाब ले आओ,
                                       बसंत संग तुम भी'वेलिंटाइन डे'मनाओ!!

Wednesday, February 13, 2013

मौसम है आशिकाना.............


मौसम है आशिकाना,जो तुम आज आते, तो बात बनती
भँवरा है दीवाना ,जो फूल सा मुस्कराते, तो बात बनती





गुलाब के साथ अगर,तुम खुद चले आते, तो बात बनती
बिन बोले कुछ भी,जो सब कुछ कह जाते, तो बात बनती

धड़कनों को यूँ छू कर,जो साँसों में समाते ,तो बात बनती

जब तक है जिंदगानी,प्यार यूँ ही निभाते ,तो बात बनती

















कल था ,आज है ,रोज ऐसा मौसम लाते ,तो बात बनती

प्यार की चली हवाएँ,मेरे लवगुरु बन आते, तो बात बनती

राहें कठिन है तुम बिन,जो साथ चले आते, तो बात बनती

निभाया है अभी तक, तमाम जिंदगी निभाते, तो बात बनती 




जब तक है जिंदगानी,प्यार यूँही दोहराओ,तो बात बने
आज दिल ने पुकारा,मेरे वेलिंटाइन बन जाओ,तो बात बने