हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Wednesday, January 22, 2014

गजल


1 2 2 2   1 2 2 2 

दिलों को जो सुहाते हैं /
दिलों पे जाँ लुटाते हैं /

निगाहों से क़त्ल करके
मुझे कातिल बनाते हैं /

दिलों के हैं अजब रिश्ते 
सदा अपने निभाते हैं /

यूँ पल पल मर रही हूँ मैं 
मुझे जिन्दा बताते हैं /

सभी अपने तुम्हारे बिन 
मुझे जीना सिखाते हैं /

सुना है ऐसे में अपने 
भी दामन छोड़ जाते हैं /

...................

Thursday, January 16, 2014

किनारा इस सरिता का

तू बहादुर बेटी है पंजाब की
तू शान आन और बान है हमारे घर की
तू झाँसी की रानी है
तुझे क्या डर अकेले
दुनिया के किसी भी कोने में जा सकती हो
हाँ
ऐसे ही तो कहते थे ना हमेशा
जब कहती थी
मेरे साथ कहीं चलने को
आज समझा रहे थे मुझे
पगली क्यों रोती है ?
तेरे अंग संग हूँ हमेशा
तेरे साथ अपनी दोनों भुजाएं
अपने दो बेटे छोड़ आया हूँ
तुम्हे जरुरत नहीं
किसी का मुँह ताकने की
दोस्त जो नहीं पूछते मत कर चिंता
जो साथ हैं उनका कर शुक्रिया
और बढती चल निरंतर
हमारे सपने पुरे करने
जो छोड़ आया हूँ अधूरे तेरे सहारे
मुझे विश्वास है तू पूरा करेगी उनको
अब किसको कहूँगी संग चलने को ???
''मैं हूँ ना''
आपको चिंता करने की जरुरत नहीं
तो शायद कहा होगा बहुतों ने
दोस्तों ने रिश्तेदारों ने
कौन खड़ा हुआ हमारे साथ उस घडी में ?
उनका अहसान वाकई नहीं उतार पाएंगे कभी  
मेरे लिए तो आप हो ना
हमेशा मेरा संभल बन, मार्गदर्शक बन
मुझे प्रेरणा देते हो
सुन रहे हो ना आप
ऐसा कहते कहते आँख जो खुली
तो तलाश थी उस अक्स की
जो मुझे चुप करा रहा था
पर कहीं नहीं था
नहीं नहीं यहीं कहीं था
या है
किनारा इस सरिता का
सरिता जिसका काम ही है
मुश्किलों को लांघना निरंतर बढ़ना

Tuesday, January 14, 2014

मकरसक्रांति दोहावली


मकर राशि में सूर्य का, जैसे हुआ प्रवेश 
हुआ उत्तरायण शुरू, शुभकामना अशेष 

भारत के त्योहार हैं ,सभी के लिए गर्व 
जीवन में उर्जा भरे ,मकरसक्रांत का पर्व 

प्रकृति कृषि ऋतुएं सभी ,हैं जीवन आधार 
सूर्य देव की अर्चना, भरे सभी भण्डार 

इस दिन से दिन रोज ही, तिल तिल बढता जाय
इस कारण सक्रांत है 'तिल सक्रांत' कहलाय 

लोकनृत्य है भांगड़ा , पंजाबी की जान 
पोंगल,बिहु औ' लोहड़ी, भारत की हैं शान

मूंग दाल चावल की खिचड़ी पाचक होय
खानपान की सादगी, मन संयम ना खोय 

रंगीला आकाश है ,मन छाया उल्लास 
उत्सव सभी सक्रांत का, मना रहे हैं ख़ास 
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Friday, January 10, 2014

कभी सोचा न था

कभी सोचा न था ...
कितनी कलरफुल थी 
मेरी दुनिया 
अब तुम्हारे बाद 
ब्लैक एंड वाइट होकर रह जाएगी 
कभी सोचा न था ...
अलमारी में पड़े 
लाल गुलाबी कपड़े 
मुंह चिड़ाएंगे और पूछेंगे 
मुझसे कई सवाल 
कभी सोचा न था ..
आइने के सामने आज 
खड़े होने में डर लगेगा
क्योंकि 
खो दूंगी वो अक्स 
जो मुझे निहारा करता था 
कभी सोचा न था ... 
बड़ी बेपरवाह थी जिन्दगी 
बस तुम्हे बताकर 
दुनिया की परवाह किये बिना 
स्वछन्द घूमा करती थी 
अब घर से बाहर कदम रखने से पहले 
मेरा ही ज़मीर मुझसे सवाल पूछेगा 
कभी सोचा न था.....
मैं भी एक दिन 
रंगीन उड़ती तितली की तरह 
अपने पर खो दूंगीं
कटी पतंग सी हो जाऊँगी 
कभी सोचा न था ..... 
फैसले तो पहले भी 
खुद लिया करती थी 
पर उन पर 
मोहर लगाने वाला ही नहीं रहेगा
कभी सोचा न था... 
कभी कोई फॉर्म भरते हुए 
मेरी कलम 
विवाहिता के कालम पर 
अटक जाएगी 
कभी सोचा न था .....
सचमुच कभी सोचा ही न था ...
                ........सरिता 

Tuesday, January 7, 2014

यादों का वो इक सफ़र है नाम दे गया

जाने वाला साल सब सुख चैन ले गया 
नयनों में है नीर दिल में दर्द दे गया /

क्या मनाएं साल उस बिन अब लगे न दिल 
एक झटके में सभी अरमान ले गया /

मुस्कराएँ हम क्या तेरे बिन ओ साथी अब
खुशिओं का तू सारा ही सामान ले गया /

उसकी हर आहट का होता है मुझे गुमाँ
खुद को समझायें क्या वो संसार से गया /

याद आती उसकी है अब रात रात भर 
यादों का वो इक सफ़र है नाम दे गया /

काटना है अब अकेले उस बिना सफ़र 
जिन्दगी भर का गमे पैगाम दे गया /

Sunday, January 5, 2014

कभी जीवन में अपने कुछ दुखद से पल भी आते हैं

1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2 

कभी जीवन में अपने कुछ दुखद से पल भी आते हैं
सभी अपने हमेशा के लिए तब छोड़ जाते हैं /

समय अपना बुरा आया,तमस भी साथ ले आया 
करीबी जो रहे अपने वही नजरें चुराते हैं /

किसे फुर्सत हमें देखे हमारा हाल अब जाने  
हमें रुसवाइओं में तन्हा अक्सर छोड़ जाते हैं /
   
मिले ढूंढे नहीं कोई सहारा बन सके जो तब   
मुसीबत में कहाँ अब लोग यूँ रिश्ते निभाते हैं /

भला कर तू भला होगा बुरा मत सोचना मन में
रवायत यह है दुनिया की करम ही साथ जाते हैं /
  
कहाँ वश मौत पे अपना नहीं जीवन पे वश अपना  
ये खेला मौत जीवन का तो भगवन ही रचाते हैं/ 
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Friday, January 3, 2014

तरही गजल

जब से उनका यहाँ आना जाना हुआ 
दिल हमारा भी उनका दिवाना हुआ /

साथ तेरे का जो छूट जाना हुआ 
तब से सबका यहाँ आना जाना हुआ /

माँग तेरी भरूं आ सितारों से मैं 
ऐसा कह जो गया फिर न आना हुआ /

माँग सूनी हुई जो सितारों भरी
माथे की बिंदी छिनना बहाना हुआ /

राहतें अब कहाँ चैन दिल को कहाँ  
जख्म अब मत कुरेदो पुराना हुआ /

याद आती रही रात भर थी मुझे 
भूल वो अब गया इक जमाना हुआ /

उसके आने की टूटी है उम्मीद अब 
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ /

लाडली ही रही बेटियाँ बाप की
लाड़ छूटे जो पति घर ठिकाना हुआ / 
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