हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Thursday, January 22, 2015

क्षणिका 1

1.
बढ़ रही हैं आशाएँ 
अनजानी 
पहचानी 
रूहानी 
ग्लोबल वार्मिंग की मानिंद 
सिमट रही हैं खुशियाँ 
तेरी 
मेरी 
अपनों की 
ग्लेशियर की मानिंद
.................................

Sunday, January 18, 2015

माँ की बेटी को सीख


लक्ष्मी है तू गेह की, तू मेरा सम्मान 
सबको देना मान तू ,भाई पिता समान |

बेटी है तो क्या हुआ,तू है घर की लाज 
तू मेरा अभिमान है, तू मेरी आवाज |

बनना मत तू दामिनी,सहकर अत्याचार 
लेना दुर्गा रूप तू ,करना तू संहार |

शत्रु सामने हो अगर ,मत होना भयभीत 
करना डट कर सामना, निश्चित होगी जीत |

मत घबराना तू कभी, जो हो जग बेदर्द 
तू है दुर्गा कालिका ,मत सहना तू दर्द |

जिसका तुझसे हो भला,उसके आना काम 
अबला नारी जो दिखे ,उसको लेना थाम ||

******

Tuesday, January 13, 2015

बनना मत तू दामिनी [कुण्डलिया]

बनना मत तू दामिनी, सहकर अत्याचार 
धरना दुर्गा रूप तू, करना तब संहार 
करना तब संहार, दिखे कोई जो रावण 
ले काली का रूप, धरा को करना पावन 
अबला लेना थाम, उसे यूँ प्रेरित करना 
सरिता करे पुकार, दामिनी मत तू बनना 
*****

Monday, January 12, 2015

कुण्डलिनी

क्या अच्छे दिन आ गए, जनता करे सवाल 
बिजली पानी सब्जियाँ ,क्यों मँहगी हर दाल 
क्यों महँगी हर दाल , भूख ने सबको मारा 
जीत गई सरकार , आम शक्स अभी हारा  
****

Saturday, January 10, 2015

हिम्मत है फौलाद [कुण्डलिया ]

बच्चा वो नादान है, लेकिन मन में चाह 
झंडा लेकर हाथ में, निकला अपनी राह 
निकला अपनी राह, रहे ना काम अधूरा 
देकर वो बलिदान, करेगा सपना पूरा 
बढ़ता है निष्काम , राह हो चाहे कच्चा 
हिम्मत है फौलाद,समझ उसे न बच्चा ||
..........

Tuesday, December 23, 2014

इंसानों को यह समझा दो [गीत]

बीच राह श्मशान बना दो 
इंसानों को यह समझा दो 

जीवन नश्वर है यह जानें 
मृत्यु सत्य है उसको मानें 
नफरत छोड़ प्यार सिखला दो 

रूप बड़ा ही सुन्दर पाया 
काया ने कब साथ निभाया 
साँच बुढ़ापे का दिखला दो  

यह जग एक मुसाफिरखाना 
इसका राज नहीं जो जाना 
राज यही उसको बतला दो 

रिश्ते सारे अजब अनूठे 
पाश मोह ममता के झूठे 
प्रीत ईश के संग लगा दो  

Monday, December 22, 2014

कागज़ कलम दवात [कुण्डलिनी]

बहते जब जज्बात हैं, रुकते ना तब हाथ 
कागज़ कलम दवात का, मिल जाता जो साथ ||
मिल जाता जो साथ, पीर है कागज़ हरता 
बहे कलम से पीर, ह्रदय सुकून से भरता ||
****