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Sunday, January 25, 2015
ऋतुराज [ कुण्डलिया ]
जाने वाला है शिशिर ,अब ऋतुराज तैयार
धानी चुनरी ओढ़कर ,धरा किया श्रृंगार
धरा किया श्रृंगार ,झूमती डाली डाली
प्रफुल्लित ह्रदय आज ,भरी है बगिया खाली
पुष्पों को अब चूम ,लगे हैं भँवरे गाने
छाया नव उत्साह , शीत लगा अभी जाने |
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Saturday, January 24, 2015
बसंत दोहावली
माघ शुक्ल की पंचमी ,शुरू हुआ मधुमास
सत्य,स्नेह,साहस सहित,ह्रदय भरे उल्लास |
बसंत ऋतु का आगमन, जाग उठी शुभ चाह
शांत ,शीत, ठंडी पवन , लाई नव उत्साह |
फूलों की हैं मस्तियाँ ,छाने लगी बहार
कहें मुबारक आपको ,बसंत का त्यौहार |
वर देना माँ शारदे, विद्द्या ,बुद्दि औ ज्ञान
प्रफुल्लित ह्रदय आज हो,करें सभी का मान |
माँ सरस्वती का लगे ,श्वेत धवल शुभ रूप
हाथों में वीणा लिए ,देवी का स्वरूप |
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Thursday, January 22, 2015
क्षणिका 1
1.
बढ़ रही हैं आशाएँ
अनजानी
पहचानी
रूहानी
ग्लोबल वार्मिंग की मानिंद
सिमट रही हैं खुशियाँ
तेरी
मेरी
अपनों की
ग्लेशियर की मानिंद
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Sunday, January 18, 2015
माँ की बेटी को सीख
लक्ष्मी है तू गेह की, तू मेरा सम्मान
सबको देना मान तू ,भाई पिता समान |
बेटी है तो क्या हुआ,तू है घर की लाज
तू मेरा अभिमान है, तू मेरी आवाज |
बनना मत तू दामिनी,सहकर अत्याचार
लेना दुर्गा रूप तू ,करना तू संहार |
शत्रु सामने हो अगर ,मत होना भयभीत
करना डट कर सामना, निश्चित होगी जीत |
मत घबराना तू कभी, जो हो जग बेदर्द
तू है दुर्गा कालिका ,मत सहना तू दर्द |
जिसका तुझसे हो भला,उसके आना काम
अबला नारी जो दिखे ,उसको लेना थाम ||
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Tuesday, January 13, 2015
बनना मत तू दामिनी [कुण्डलिया]
बनना मत तू दामिनी, सहकर अत्याचार
धरना दुर्गा रूप तू, करना तब संहार
करना तब संहार, दिखे कोई जो रावण
ले काली का रूप, धरा को करना पावन
अबला लेना थाम, उसे यूँ प्रेरित करना
सरिता करे पुकार, दामिनी मत तू बनना
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Monday, January 12, 2015
कुण्डलिनी
क्या अच्छे दिन आ गए, जनता करे सवाल
बिजली पानी सब्जियाँ ,क्यों मँहगी हर दाल
क्यों महँगी हर दाल , भूख ने सबको मारा
जीत गई सरकार , आम शक्स अभी हारा
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Saturday, January 10, 2015
हिम्मत है फौलाद [कुण्डलिया ]
बच्चा वो नादान है, लेकिन मन में चाह
झंडा लेकर हाथ में, निकला अपनी राह
निकला अपनी राह, रहे ना काम अधूरा
देकर वो बलिदान, करेगा सपना पूरा
बढ़ता है निष्काम , राह हो चाहे कच्चा
हिम्मत है फौलाद,समझ उसे न बच्चा ||
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