हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Monday, September 30, 2013

चली आना बनी राधा किसी पैगाम से पहले

मुझे अब माफ़ कर देना खुदा अंजाम से पहले 
लिया है नाम उसका जो तुम्हारे नाम से पहले //

बनो सीता अगर तो साथ तुम देना हमेशा ही 
न लक्ष्मण रेखा यूँहीं  लांघना तुम राम से पहले // 

तुम्हें राधा सा बनना श्याम की इस सूने जीवन में 
तुम्हारा नाम भी आएगा मेरे नाम से पहले //  

अगर दुख सुख में यूँहीं साथ तुम मेरा निभाओगी 
करूँगा पूरा हर अरमान जीवन शाम से पहले //

बजी जो मुरलिया मेरी धुनों से प्यार निकलेगा 
चली आना बनी राधा किसी पैगाम से पहले //

मिला जो साथ तेरा जिंदगी भर के लिए मुझको  
सफलता देख लूँगा आ गए परिणाम से पहले //
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Friday, September 27, 2013

माँ [कुण्डलियाँ ]

माँ के आंचल में मिले ,ममता की ही छाँव 
शुभाशीष पाओ  मधुर, नित्य दबाकर पाँव  
नित्य दबाकर पाँव , आशीर्वाद तुम लेना 
माँ से  बड़ा न स्वर्ग ,उसे दुख कभी न देना  
मिट जाते दुख-दर्द , पास में माँ के जा के
ममता के ही फूल ,मिलें आंचल में  माँ के 
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Tuesday, September 24, 2013

फिर हंसता है चेहरा तो क्यों यह मन रोता है?

चेहरे की मुस्कुराहट पर ना जाओ जनाब
यह तो है रोते हुए दिल का नक़ाब
कहते हैं लोग कि चेहरा मन का दर्पण होता है
फिर हंसता है चेहरा तो क्यों यह मन रोता है?
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Monday, September 23, 2013

मुक्तक

1.
कोई छू जो गया था तो बाकी है अहसास
जाने वो कौन था जिसपर दिल को था विश्वास
सब कह रहे थे, वो कोई तेरा अपना था
आँख जब खुली तो जाना,वो तो इक सपना था
2.
खुली आँख से देखा है मैने इक सपना
नही है कोई और वो है कोई मेरा अपना
बनाए रखना तुम वो अपने का अहसास
नही कभी भुलाना कि तुम हो मेरे ख़ास
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Saturday, September 21, 2013

दिल है अपना पर प्रीत क्यों पराई

मिलन के साथ हे प्रभु कैसी यह जुदाई
दिल है अपना पर प्रीत है क्यों पराई
मिलन जुदाई की क्यों रीत यह बनाई 
मुश्किल है देना किसी अपने को विदाई
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Friday, September 20, 2013

कुण्डलिया [प्यार]

कर लो सब से दोस्ती, छोड़ो अब तकरार 
जीवन है दिन चार का ,बांटो थोड़ा प्यार //
बांटो थोड़ा प्यार, यही है दौलत असली 
प्यार स्नेह को मान ,और सब ही नकली 
धन दौलत सब छोड़ ,प्यार जीवन में भर लो   
रहे कोई न गैर ,सब से दोस्ती कर लो //
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Thursday, September 19, 2013

कुण्डलिया [गजानन]

पाकर रूप नया गजा, आ गए जब द्वार 
जीवन भर उत्साह से, करते नव संचार //
करते नव संचार ,दामन ख़ुशी से भरकर  
करते हमें निहाल, सभी कष्टों को हरकर   
करें विदाई आज ,गीत मंगल के गाकर   
आना अगले बरस ,रूप अभिनव ही पाकर 
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